आख़िर क्यों बढ़ रहा है ट्यूशन का चलन ?.
आज हमारे पूरे देश में चाहे सरकारी स्कूल हो या प्राइवेट स्कूल दोनो स्कूल के अध्यापक बच्चों को ट्यूशन के लिए दबाव बनाना शुरू कर देते हैं जिससे मजबूरन बच्चों को ट्यूशन लगाना पड़ता है और जिस से अभिभावकों पर एक्स्ट्रा बोझ पड़ता है बात करे सरकारी स्कूल के अध्यापकों की तो जब उन्होंने सरकार के द्वारा मोटी तनखा मिल रही हैं तो वे ट्यूशन के लिए क्यों जोर देते हैं। और रही बात प्राइवेट स्कूल की तो जब स्कूल के द्वारा बच्चों से ट्यूशन के नाम पर (स्कूल में पढ़ने) के लिए एक मोटी रकम ली जाती हैं तो फिर बच्चों को क्या वे स्कूल में पढ़ाते नहीं ? क्या वे स्कूल में अच्छा नहीं पढ़ाते हैं क्या ? अच्छा पढ़ाते हैं तो फिर ट्यूशन के लिए दबाव क्यों बनाया जाता है। क्या अब बच्चे कमजोर हो गए हैं ? जबकि बच्चें घर पर भी मोबाइल के माध्यम से पढ़ाई कर रहे हैं फिर भी उनपर ट्यूशन का दबाव बनाया जाता है ?महिला कल्याण शिक्षा सुधार समिति इसका पूर्ण रूप से विरोध करती है अगर बच्चा कमजोर है तो उस पर स्कूल में एक्स्ट्रा ध्यान दिया जाना चाहिए एक्स्ट्रा क्लास दी जानी चाहिए ना की ट्यूशन के लिए जोर दिया जाए। अगर स्कूलो ने ट्यूशन खोरी बंद नहीं की तो इसके लिए महिला कल्याण शिक्षा सुधार समिति एक बहुत बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होगी।
रमेश सैनी सहारनपुर इंडियन टीवी न्यूज़