ये नई दिल्ली से सहरसा को जानेवाली गाड़ी वैशाली का हाल है जहां नाही महिलाएं सुरक्षित हैं ना बच्चे,और ना वृध्द आदमी जबकि रेलवे के दूारा इनकी सुरक्षा और सहायता की व्यवस्था की जाती हैं एक तरफ सरकार ये आम आदमी जो सफर कर रहें हैं उनके लिए बेहतर सुविधाएं देने का वादा करती हैं और दिखावे के लिए वंदे भारत और तेजस जैसी ट्रैन का परिचालन करती हैं लेकिन मुद्दे की बात ये हैं की इन ट्रेनो में सिर्फ ऐसी और रिजर्वेषण की सीटे और डिब्बे हैं लेकिन जेनरल का एक भी नही जबकि सरकार आम आदमी से फेयर के नाम पर uts जैसे ऐप के माध्यम से पैसो की उगाही करती हैं जबकि ये ऐप आपको टिकट तो देती हैं जिससे केवल आप यात्रा कर सकते हैं सीट नही मिलेंगी लेकिन सवाल ये उठता हैं की इस देश की 70 प्रतिशत लोग जेनरल में सफर करते हैं जिससे रेलवे और सरकार को 60 हजार करोड़़ से ज्यादा की कमाई होती हैं लेकिन आज भी भारत जैसे देश में वैशाली जैसे सुपरफास्ट में अगर आम आदमी को यात्रा के नाम पर मौत का सामना करना पड़ता हैं महिलाएं अपने चरित्र का चिरहरण करवाकर कभी शौचालय के नीचे बैठकर अपने बच्चों को वही पर सुलाकर जहां अगर कोई यात्री को शौचालय लगे तो वो वहां जाने तक से डरता हैं अनेको प्रकार की अशुरक्षित तरिके से इनकी यात्रा होती हैं वो इसलिए क्योंकि इनके पास ac और रिजरवेंषण के पैसा नही होता हैं और आज भी टेन की वही दशा हैं कोई सुधार नही हुआ जबकि सरकार और रेलवे ने इनको सभी प्रकार से लुटकर केवल पैसा कमाया जबकि इनको सीट तक नही मिलती सांस लेने तक में भी दिक्कत होती हैं इसलिए मैं भारत की सरकार और रेलवे बोर्ड से निवेदन करता हूं तत्काल इनको नई टेनों और सुरक्षा व्यवस्था कायम हो ताकि ये जेनरल में भी निशचिंत होकर यात्रा कर सकें क्योंकि आप अगर कमाते हैं तो वो इनका ही श्रम होता हैं लेकिन ताजुब की बात ये हैं की यात्रीयों को आप सीट तो दुर की बात हैं सुरक्षा तक नही दे तो यही हैं वैसाली जैसे सुपरफास्ट में आम लोंगो की हालात ये हमारे देश और रेलवे के लिए काफी निंदनीय हैं अगर आपको थोड़ा भी शर्म बचा होगा तो तत्काल सुरक्षा व्यवस्था प्रदान करने की कृपा करेंगे । संपादक – अंशु कुमार ठाकुर
दिनांक – 23/7/25
सहरसा बिहार।