पत्रकार सुरेन्द्र सिंह बड़ेर अलवर (इंडियन टीवी न्यूज़)
तीज की सवारी में आगे गामा पहलवान निशान पचरंगा लेकर शाही हाथी पर चलते हैं।
राजस्थान। जयपुर में हर साल सावन में तीज और चैत्र में गणगौर माता की सवारियां निकाली जाती हैं। दोनों ही नगर भ्रमण पर निकलती हैं। इनके स्वरूप, सवारी के तरीके और धार्मिक भाव में फर्क है। दोनों पर्वों से जुड़ी ये शाही सवारियां केवल रस्म नहीं, बल्कि जयपुर राजपरिवार की परंपरा और राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है।
सिटी पैलेस के कला एंड संस्कृति विभाग के ओएसडी रामू रामदेव ने बताया- तीज और गणगौर दोनों देवी पार्वती के रूप हैं। दोनों सिटी पैलेस की जनानी ड्योढ़ी में स्थित रावले में विराजमान रहती हैं और वहीं पूजन किया जाता है। तीज और गणगौर माता की सवारी सिटी पैलेस से शुरू होती है। इससे पहले सिटी पैलेस की जनानी ड्योढ़ी में पूर्व राजपरिवार के सदस्य पारंपरिक पोशाक में त्रिपोलिया गेट पर माता की आरती उतारते हैं।