इंडियन टीवी न्यूज़ ब्यूरो चीफ भोपाल मध्य प्रदेश प्रवीण कुमार दुबे
पर्यावरण पर मंथन:जज ने पुलिस से पूछा- प्रदूषण रोकने किस एक्ट में चालान बनाते हो… सन्नाटा छाया तो खुद ने बताई बीएनएस की धाराएं
भोपाल
फाइल फोटो
• क्रेशर की जगह बस्ती बन गई, अधिकारी बोले- सीएम हेल्पलाइन में शिकायत करें
पर्यावरण संरक्षण पर सोमवार को राजधानी में आयोजित कार्यशाला उस वक्त सन्नाटे में डूब गई, जब जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव न्यायाधीश सुनित अग्रवाल ने पुलिस अधिकारियों से सवाल दागा- “प्रदूषण रोकने के लिए आप किन नियमों के तहत कार्रवाई करते हैं?”
सवाल हवा में तैरता रहा और अफसर खामोश बैठे रह गए। हॉल में कुछ पल के लिए चुप्पी छा गई। आखिरकार जज अग्रवाल ने ही जवाब दिया। उन्होंने याद दिलाया कि आईपीसी की धारा 268 से 278 और बीएनएस की धारा 270 से 287 तक पुलिस को प्रदूषण रोकने सहित कई मामलों में कार्रवाई का अधिकार है। साथ ही उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए कहा- “पर्यावरणीय अपराधों पर कानून कठोर है और इनके पालन में समाज की भागीदारी बेहद अहम है।”
होटल पलाश रेसिडेंसी में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जिला न्यायालय भोपाल और म.प्र. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की साझा कार्यशाला में पर्यावरणीय कानूनों, नियमों, प्रदूषण के प्रभाव और पर्यावरण क्षरण पर गहन चर्चा हुई। विशेषज्ञ पीके त्रिवेदी (सेवानिवृत्त डायरेक्टर, पर्यावरण) ने पर्यावरणीय कानूनों और प्रदूषण से होने वाले नुकसान पर विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम में क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भोपाल बृजेश शर्मा, सीएमएचओ भोपाल डॉ. मनीष शर्मा समेत कई अधिकारी और विशेषज्ञ मौजूद रहे।
खदान तो ऐसी जगह आवंटित होती है जहां बस्ती नहीं होती। बाद में बस्ती बस जाती है और खदान बंद करने की मांग शुरू हो जाती है। ऐसे में क्या करें?” -ऐसी शिकायतें सीएम हेल्पलाइन, कलेक्टर और माइनिंग ऑफिसर तक पहुंचाई जा सकती हैं।
बड़े और छोटे तालाबों में कई नाले मिलने से जल गुणवत्ता खराब हो रही है। -प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) इस दिशा में काम कर रहा है।
आदमपुर छावनी में कचरे के निष्पादन से भूजल प्रदूषण हो रहा।