सरकार की स्थानांतरण नीति महज दिखावा समिति प्रबंधक के कार्य प्रणाली से किसानों को हो रही है समस्याएं

सीजन खरीफ की हो य फिर रबी की,किसान समिति प्रबंधक से रहते परेशान
सिंगरौली / निवास
जिले के सरई तहसील क्षेत्र निवास जिला सहकारी केन्द्रीय बैक मर्यादित शाखा निवास मे लम्बे समय से एक ही जगह पर अंगद की तरह पैर जमा कर बैठे है समिति प्रबंधक दीनबंधु कुशवाहा। ज्ञात हो की निवास समिति प्रबंधक दीनबंधु कुशवाहा पिछले कई बार शिकायत की शुर्खियो मे घिरे रहे,चाहे खाद्य की वितरण हो या रबी की फसल य खरीफ की फसल खरीदी के समय किसानों से गडबडी का शिकायत होता रहता है,पिछले साल समिति प्रबंधक का स्थानांतरण हुआ था,किन्तु सफेद पोशाक के रसूख दारो की वजह से स्थानांतरण रुक गया, जबकि सिंगरौली प्रभारी मंत्री संपतिया उइके समीक्षा बैठक के दौरान उन्होने कहा कि तीन साल से ऊपर एक स्थान मे जमे अधिकारी कर्मचारी सभी का स्थानांतरण किया जाना है। लेकिन निवास समिति मे स्थानांतरण नीति का नही हुआ कोई असर,महज सिर्फ दिखवा तक ही सीमित है। सरकार की स्थानांतरण नीति पूरी तरह से नतमस्तक है,जी हां आपको यह सुनकर आश्चर्य जरूर हुआ होगा लेकिन यह सत्य इसलिए है क्योंकि एक ही जगह पर लम्बे समय से पदस्थ हैं लेकिन इनका स्थानांतरण नहीं होता,चाहे चुनाव के समय हो या फिर स्थानांतरण नीति के तहत इन पर किसी की नजर नहीं पड़ती। अब लंबे अर्से से एक समिति में कोई समिाति प्रबंधक जमे रहेंगे तो तरह-तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म होना भी स्वाभाविक है।
इन दिनों अपने रसूख को लेकर प्रबंधक सुर्खियों में हैं, इनके बारे चर्चा है कि कहीं न कहीं इनकी पकड़ मजबूत है तभी तो स्थानांतरण नीति इनके सामने आते ही विफल हो जाती है,अब किस वजह से इनका स्थानांतरण नहीं रहा है ये तो बता पाना मुश्किल है। लेकिन इतना जरूर है कि इन दिनों तरह-तरह की चर्चाएं चल रही है।
नेताओं में उठ रहे विरोध के सुर
निवास समिति प्रबंधक दीनबंधु कुशवाहा का लंबे समय बाद भी सिंगरौली जिले के निवास समिति से स्थानांतरण न होना अब स्थानीय नेताओं में भी विरोध के सुर उठने लगे हैं। कुछ नेताओं ने कहा कि ज्यादा समय तक एक ही समिति में किसी कर्मचारी के पदस्थ रहने से भ्रष्टाचार होने की संभावना बढ़ जाती है, साथ स्थानांतरण नीति की भी अवहेलना होती है। ऐसे में निवास समिति दीनबंधु कुशवाहा का स्थानांतरण बहुत पहले ही हो जाना चाहिए था किंतु अब तक इन पर सरकार की नजर नहीं पड़ रही है, ऐसे में निश्चित रूप से भ्रष्टाचार होने की संभावना को कम नहीं किया जा सकता।