ब्यूरो चीफ सुंदरलाल जिला सोलन
पीएम श्री केन्द्रीय विद्यालय 14 जीटीसी सुबाथू में मनाया गया राष्ट्रीय खेल दिवस समारोह
पीएम श्री केन्द्रीय विद्यालय 14 जीटीसी सुबाथू में राष्ट्रीय खेल दिवस अत्यंत धूमधाम, उल्लास और गरिमामय वातावरण में मनाया गया। यह विशेष दिवस हॉकी के जादूगर, ओलंपिक विजेता और भारत रत्न मेजर ध्यानचंद की जन्म जयंती के उपलक्ष्य में प्रतिवर्ष मनाया जाता है। इस अवसर पर विद्यालय परिवार के सभी शिक्षकगण, छात्र-छात्राएँ एवं कर्मचारियों ने एकत्र होकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके योगदान को स्मरण किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय प्रार्थना एवं थीम आधारित विशेष विचार – “खेलो और खिलो” के साथ हुआ। विद्यार्थियों ने इस थीम को आत्मसात करते हुए विभिन्न पोस्टर मेकिंग, नारा लेखन, तथा चार्ट प्रदर्शनी में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। प्रदर्शनी में प्रस्तुत संदेशों के माध्यम से छात्रों ने यह स्पष्ट किया कि खेल केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह जीवन में आत्मविश्वास, अनुशासन, टीम भावना और नेतृत्व क्षमता विकसित करने का एक माध्यम है।
इसके पश्चात कक्षा 11 ‘सी’ के छात्र अभिनव नेगी ने मंच पर आकर मेजर ध्यानचंद के जीवन पर अत्यंत प्रभावशाली और प्रेरणादायक भाषण प्रस्तुत किया। उन्होंने उनके बाल्यकाल से लेकर भारतीय हॉकी टीम में उनकी अद्भुत उपलब्धियों तक का विस्तृत वर्णन किया। भाषण में बताया गया कि मेजर ध्यानचंद ने अपनी सादगी, मेहनत और खेल भावना से न केवल भारत का नाम विश्व में रोशन किया, बल्कि पूरे देश के युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बने।
इसके बाद कक्षा 11 ‘सी’ की छात्राएँ सूहानी सिंह एवं रितिका ने एक भावपूर्ण और जोशीली कविता का वाचन किया। इस कविता में हॉकी के जादूगर को भारत का गौरव बताया गया और खेलों के माध्यम से जीवन में ऊँचाइयों तक पहुँचने का संदेश दिया गया। कविता ने पूरे वातावरण को रोमांचित कर दिया और विद्यार्थियों में उत्साह का संचार किया।
विद्यार्थियों के लिए विशेष रूप से मानसिक दौड़ (Mental Race) तथा 21वीं सदी के कौशल आधारित खेल प्रतियोगिताएँ आयोजित की गईं, जिनमें बड़ी संख्या में छात्रों ने भाग लिया। इन प्रतियोगिताओं का उद्देश्य केवल प्रतिस्पर्धा तक सीमित न रहकर छात्रों में निर्णय क्षमता, समस्या समाधान, सहयोग एवं रचनात्मकता जैसी क्षमताओं का विकास करना रहा। सभी प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और अपने हुनर का प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम को और अधिक रोचक बनाने के लिए विद्यालय के शिक्षकों ने भी टीचर रेस में भाग लेकर खेल भावना का परिचय दिया। शिक्षकों को दौड़ते और उत्साहपूर्वक प्रतिस्पर्धा करते देख छात्रों का उत्साह कई गुना बढ़ गया। यह दृश्य सभी के लिए अत्यंत प्रेरणादायक रहा और यह संदेश दिया कि जीवन के हर पड़ाव पर खेल का महत्व बना रहना चाहिए।
विद्यालय की प्राचार्या आशा चौधरी ने अपने उद्बोधन में कहा –“मेजर ध्यानचंद का जीवन हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने यह साबित किया कि साधन-सुविधाएँ सीमित होने पर भी लगन और परिश्रम से कोई भी लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है। ‘खेलो और खिलो’ का संदेश केवल खेलों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की एक सकारात्मक सोच है। खेल हमें अनुशासन, परिश्रम, धैर्य और आत्मविश्वास प्रदान करते हैं। जब हम मैदान पर खेलते हैं तो हार-जीत से ऊपर उठकर टीम भावना और सहयोग सीखते हैं। इसलिए आवश्यक है कि हर विद्यार्थी खेलों को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाए और जीवन में आगे बढ़े। खेल और शिक्षा का समन्वय ही छात्रों को एक संपूर्ण व्यक्तित्व प्रदान करता है।”
इसके साथ ही उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे खेलों में सक्रिय रूप से भाग लें और “खेलो और खिलो” के संदेश को अपने जीवन का मूलमंत्र बनाएं।
इस अवसर पर गणित ओलम्पियाड में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विजयी छात्रों को विद्यालय मंच पर बुलाकर पदक और प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया। सम्मान प्राप्त कर छात्रों के चेहरे पर गर्व और प्रसन्नता की झलक स्पष्ट दिखाई दे रही थी।
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। यह आयोजन न केवल विद्यार्थियों और शिक्षकों में खेलों के प्रति जागरूकता बढ़ाने वाला रहा, बल्कि सभी को यह संदेश भी प्रदान कर गया कि “खेलो और खिलो” जीवन में सफलता, स्वास्थ्य और खुशहाली की कुंजी है।