यमुनानगर
शहर के अधिकतर नामी निजी स्कूलों के बाहर नाबालिग छात्र मोडिफाइड दुपहिया वाहनों से पटाखे बजाते हुए ध्वनि प्रदूषण फैला रहे।
ट्रैफिक पुलिस का उन पर कोई खौफ खौफ नहीं है।
अमूमन स्कूल की छुट्टी के समय निजी स्कूलों के बाहर ये नजारा हर स्कूल के बाहर देखने को मिल जाता है अमीर मां-बाप की बिगड़ी संतानें आते-जाते राहगीरों और छात्राओं को आये दिन परेशान करती देखीं जा सकती हैं ।
प्रशासन ने नियम तो बहुत बना रखें हैं परंतु अभिभावक और पुलिस दोनों ही बिगड़े बच्चों की जिद्द व दबंगई के आगे बौने और लाचार साबित हो रहें हैं
बडे घरानों में मां-बाप के गैर जरुरी लाड-प्यार ने बच्चों को खुली छूट दी हुई है।
जिसका नाजायज फायदा उठाते हुए ये बच्चे बिना हेल्मेट और जरूरी दस्तावेजों के ट्रैफिक जाम कर हुडदंग मचाते हुए महिलाओं और स्कूली बच्चियों को परेशान कर फब्तियां भी कसने से बाज नहीं आते ।
जब भी कभी किसी अभिभावक के बुलाने पर डाॅयल 112 पुलिस सायरन बजाते हुए आती है तो ये नाबालिग छात्र भीड का फ़ायदा उठा कर गायब हो जाते हैं।
ऐसे में ट्रैफिक पुलिस विभाग की हर दिन पैट्रोलिंग और छापा मारकर कडी कार्यवाही की दरकार है ताकि दबंगई और छेडछाड की घटनाओं पर लगाम लगाई जा सके।
यमुनानगर से संवाददाता संदीप गाँधी की विशेष रिपोर्ट