इंडियन न्यूज़ रिपोर्टर संतोष गोल्हानी
सिवनी/लखनादौन, मध्य प्रदेश। सिवनी जिले में पी.आई.यू. (परियोजना कार्यान्वयन इकाई) के सरकारी निर्माण कार्य अब विकास नहीं, विनाश की इबारत लिख रहे हैं। केवलारी के संदीपनी विद्यालय की छत ढहने की भयावह घटना के बाद भी, प्रशासन ने सबक नहीं लिया। अब लखनादौन के भैरोथान कन्या छात्रावास और ग्राम पंचायत सग़ई के हॉस्टल भवन खुले भ्रष्टाचार और अंधे प्रशासनिक संरक्षण की मिसाल बन चुके हैं। ये परियोजनाएँ किसी ब्लैक-बॉक्स से कम नहीं हैं न कोई ठेकेदार का नाम, न लागत का ब्यौरा, न विभाग का बोर्ड! यह पारदर्शिता की हत्या सीधे तौर पर यह साबित करती है कि जनता के पैसे की लूट को छिपाने की साजिश चल रही है।PIU का ‘पारदर्शिता’ मॉडल जहाँ जानकारी ही नहीं, वहाँ जवाबदेही भी नहीं जनपद पंचायत लखनादौन के जनजाति कार्य विभाग हॉस्टल का निर्माण कार्य दो साल से अधिक समय से अधूरा पड़ा है, जबकि इसे मात्र 6 माह में पूरा होना था। यह सिर्फ समय-सीमा का उल्लंघन नहीं, बल्कि सरकारी धन के दुरुपयोग का जीता-जागता सबूत है।
सबसे बड़ा अपराध यह है कि इन निर्माण स्थलों पर सूचना बोर्ड (Information Board) पूरी तरह नदारद हैं। जनता को यह जानने का संवैधानिक अधिकार है कि यह परियोजना कितनी लागत (Sanctioned Cost) पर, किस विभाग द्वारा, किस ठेकेदार से और कितनी अवधि में पूरी होनी है। PIU सिवनी ने जानबूझकर यह जानकारी छिपाकर, भ्रष्टाचार को अनाधिकारिक छूट दी है। जब यह ही नहीं पता कि ठेकेदार कौन है, तो जवाबदेही (Accountability) किस पर तय होगी? यह प्रशासनिक मिलीभगत का सबसे निर्लज्ज उदाहरण है।घटिया सामग्री का ‘डबल इंजन’ घोटाला इन अंधेरे निर्माणों में तकनीकी मानकों को निर्ममता से कुचला जा रहा है:कमजोर नींव हॉस्टल में तकनीकी विनिर्देशों से कम मोटाई का कोटा पत्थर लगाया गया और 4 इंच के मानक के बजाय सिर्फ 1-2 इंच की मोर्टार परत डाली गई। यह इमारत की स्थायित्व (Durability) और संरचनात्मक अखंडता (Structural Integrity) पर सीधा हमला है।सीमेंट चोरी कंक्रीट स्लैब में सीमेंट का अनुपात इतना कम रखा गया है कि बीमार इमारत कभी भी धराशायी हो सकती है। निम्न गुणवत्ता और क्षतिग्रस्त शटरिंग का उपयोग कर स्लैब की गुणवत्ता से समझौता किया गया है।
*सामग्री की क्रूरता* लखनादौन के भैरोथान में फ्लाई ऐश सीमेंट की घटिया ईंट, कम सीमेंट, और सबसे खतरनाक, काली रेत (स्टोन सैंड) का उपयोग हो रहा है।
इन आपराधिक कृत्यों पर मुहर लगाने के लिए, सामग्री परीक्षण की क्षेत्रीय प्रयोगशाला स्थल पर केवल एक फर्जी बोर्ड है। परीक्षण उपकरण (CTM) अनुपस्थित हैं—यानी, गुणवत्ता नियंत्रण की पूरी प्रक्रिया को रद्दी की टोकरी में फेंक दिया गया है।प्रशासनिक निष्क्रियता नहीं, यह आपराधिक संरक्षण हैइन गंभीर अनियमितताओं के पीछे विभाग के उपयंत्री और सहायक यंत्री की खुली मिलीभगत है। यह ‘कर्तव्य में लापरवाही’ नहीं है, बल्कि भ्रष्टाचार को सक्रिय संरक्षण देना है। एस.डी.ओ. (SDO) महोदय को शिकायत के बावजूद उनका साइट पर न आना और उपयंत्री द्वारा फोन का जवाब न देना, यह साबित करता है कि ठेकेदारों को सरकारी लाइसेंस मिला हुआ है, जहाँ उन्हें कोई रोकने वाला नहीं है।सूत्रों के अनुसार, इन ठेकेदारों का सीधा संबंध सत्ताधारी पार्टी से है। यही कारण है कि पत्थर क्रेशर में हो रही अवैध खुदाई पर खनिज और राजस्व अधिकारी मौन हैं। यह मौन चीख़-चीख़ कर कह रहा है कि मोहन यादव सरकार के मंत्रियों का हाथ इन ठेकेदारों के सिर पर है, और प्रशासनिक अधिकारियों की जेबें ‘पद के हिसाब से मोटी रकम’ से भर दी गई हैं।क्या कलेक्टर दिखाएंगे न्यायिक साहस केवलारी हादसे में मजदूर घायल हुए हैं। लखनादौन हॉस्टल कभी भी ढह सकता है, जिससे मासूम आदिवासी बच्चों का जीवन खतरे में है। यह समय कोरे आश्वासनों का नहीं, बल्कि कठोर कार्रवाई का है।सिवनी जिले के कलेक्टर के सामने दो रास्ते हैं: या तो वे राजनीतिक दबाव के आगे झुककर इन मामलों को ठंडे बस्ते में डाल दें, या फिर जनता के सेवक के रूप में, वे कठोर न्यायिक साहस दिखाएं। हम मांग करते हैं कि PIU सिवनी के सभी निर्माण स्थलों पर तत्काल प्रभाव से सूचना बोर्ड लगाए जाएँ।दोषी ठेकेदारों (जिनके नाम सार्वजनिक किए जाने चाहिए) और विभाग के उपयंत्री/सहायक यंत्री के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत तत्काल मुकदमा दर्ज (FIR) किया जाए। इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय, समयबद्ध और सूक्ष्मता से जाँच (Forensic Audit) कराई जाए।अगर समय रहते इन भ्रष्टाचार की इमारतों को ध्वस्त नहीं किया गया, तो भविष्य में होने वाली किसी भी बड़ी त्रासदी की सीधी जिम्मेदारी सिवनी प्रशासन और राज्य सरकार की होगी।
जागरूक नागरिक संतोष गोल्हानी द्वारा, सिवनी/लखनादौन में जनजाति कार्य विभाग के PIU निर्मित आदिवासी हॉस्टल भवनों (भैरोथान/सग़ई) में गंभीर भ्रष्टाचार और घटिया सामग्री के संबंध में, मुख्यमंत्री, कलेक्टर और अनुविभागीय अधिकारी (एसडीम) लखनादौन को शिकायत आवेदन स्पीड पोस्ट के माध्यम से दे दिया गया है।शिकायत में ‘आज का नव संसार’ की खोजी रिपोर्ट का हवाला देते हुए, तत्काल उच्च-स्तरीय जाँच और दोषी ठेकेदार व संबंधित PIU कर्मचारियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत FIR दर्ज करने की मांग की गई है।अब आगे क्या कार्रवाई होगी, यह प्रशासन के न्यायिक साहस और इच्छाशक्ति पर निर्भर करेगा। हम इस मामले में कलेक्टर और मुख्यमंत्री कार्यालय से त्वरित संज्ञान तथा मासूम आदिवासी छात्रों के जीवन को सुरक्षित रखने के लिए कड़े कदम उठाए जाने की उम्मीद करते हैं।
इस बात पर ज़ोर देता है कि आपने शिकायत दे दी है और अब आप प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।