ग्राम पंचायत तरावां में सरकारी धन के बंदरबांट की चर्चा जोरो पर, जांच की मांग
नन्दगोपाल पाण्डेय ब्यूरोचीफ सोनभद्र
हैंडपंप मरम्मत, टैंकर से पेयजलापूर्ति व रिबोर के नाम पर मची लूट
पंचायती एक्ट के विपरित विकास कार्यो का भुगतान करने का है आरोप
सोनभद्र। ग्राम पंचायतों में विकास के नाम पर सरकारी धन का जमकर बंदरबांट किया जा रहा है। भ्रष्टाचार के विरूद्ध जीरो टालरेंस की नीति पर कार्य करने वाली सूबे की योगी सरकार के निर्देशानुसार अधिकारियों की टीम समय-समय पर ग्राम पंचायतों में कभी औचक छापेमारी तो कभी विकास कार्यो के गुणवत्ता की जांच कर इस पर अंकुश लगाने का दावा करती हैं, फिर भी ग्राम पंचायतों में जांच के नाम पर खानापूर्ति ही दिखाई देती है। विकास कार्यो में भ्रष्टाचार चरम पर है। पेयजल आपूर्ति, हैंडपंप मरम्मत, खडंजा निर्माण, रिबोर, रिचार्ज पिट का निर्माण/मरम्मत सहित मच्छर रोधी दवाओं के छिड़काव के नाम पर प्रतिवर्ष भारी भरकम सरकारी धन का दुरूपयोग किया जा रहा है।
सदर विकास खंड के ग्राम पंचायत तरावां की बात करें तो यहां पंचायती एक्ट के विपरित अधिकांश कार्यो के भुगतान किए गए हैं, जिसमें हैंडपंप मरम्मत, टैंकर पेयजलापूर्ति व रिबोर आदि के नाम पर भारी भरकम सरकारी धन खर्च किए गए है। भू-जल स्तर को बढ़ाने के लिए रिचार्ज पिट के निर्माण/मरम्मत पर भी भारी भरकम धनराशि व्यय किया गया है। हैरानी की बात तो यह है कि बीते वर्ष तरावां ग्राम पंचायत में भू-जल स्तर को बढ़ाने के लिए कई स्थलों पर रिचार्ज पिट का निर्माण कराया गया था, जबकि वर्तमान समय में एक भी रिचार्ज पिट उपयोग योग्य नहीं है। ग्राम पंचायत में ग्राम प्रधान व सचिव की मिलीभगत से सरकारी धन का खुल कर बंदरबांट किया गया है। इसी तरह रिबोर के नाम पर नया बोर कराकर सरकारी धन का गमन किया गया। खडंजा निर्माण में भी भ्रष्टाचार चरम पर है। ग्रामीणों ने बताया कि तरावां ग्राम पंचायत में अब तक जितने भी कार्य कराए गए हैं, यदि उसकी शासन स्तर पर निष्पक्ष जांच कमेटी बनाकर करा दी जाए तो न केवल एक बड़ा भ्रष्टाचार उजागर होगा, बल्कि इसमें लिप्त ग्राम प्रधान व सचिव पर कार्रवाई की गांज गिर सकती है। उधर लगाए जा रहे आरोपों के बावत डीपीआरओ नमिता शरण से संपर्क कर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन वे मौजूद नहीं मिली। लिहाजा उनका पक्ष नहीं लिया जा सका।