दुद्धी सोनभद्र। मुख्य चिकित्साधिकारी एवं नोडल अधिकारी के छापेमारी, नोटिस जारी करने और मुकदमा दर्ज करने के आदेश के बावजूद दुद्धी कस्बे में बिना पंजीकरण वाले अस्पतालों का संचालन अनवरत जारी है, जिससे स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब नोडल अधिकारी द्वारा अस्पतालों को सील किया जा रहा है और नोटिस दी जा रही है, तो आखिर किनके संरक्षण में ये अवैध अस्पताल दोबारा खुल जाते हैं। यह बड़ा सवाल अब आम जनता के बीच चर्चाओं का विषय बना हुआ है।
जानकारी के अनुसार, दुद्धी कस्बे के अमवार रोड पर एक बच्चों का अस्पताल संचालित है जो बाहर से बंद और ताले में जकड़ा दिखाई देता है, लेकिन अंदर अंडरग्राउंड हिस्से में दर्जनों बच्चों का इलाज होता है। प्रतिदिन दो से चार बच्चे भर्ती रहते हैं और उनके तिमारदारों को सख्त हिदायत दी जाती है कि वे अस्पताल के भीतर ही रहें। इसके बावजूद अस्पताल परिसर के बाहर कुछ तिमारदार बैठे देखे जा सकते हैं।
स्थानीय स्रोतों का कहना है कि इस अस्पताल के अवैध संचालन की जानकारी स्वास्थ्य विभाग के स्थानीय जिम्मेदारों से लेकर जिला स्तर तक है, फिर भी इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। अस्पताल बिना बोर्ड और पंजीकरण नंबर के खुलेआम संचालित हो रहा है, जिससे स्वास्थ्य सुरक्षा से समझौते की आशंका बढ़ गई है।
इस संबंध में जब स्वास्थ्य विभाग के नोडल अधिकारी डॉ. जी.एस. यादव से सेलफोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उनका फोन नहीं उठा, लिहाजा उनका पक्ष नहीं लिया जा सका।
सोनभद्र, तहसील रिपोर्टर दुद्धी, विवेक सिंह