नरेश सोनी इंडियन टीवी न्यूज नेशनल ब्यूरो हजारीबाग।
“स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही ने पाँच मासूमों की जिंदगी पर संकट ला दिया”: चाईबासा घटना पर डुमरी विधायक जयराम कुमार महतो ने जताया गहरा शोक, कड़ी कार्रवाई की मांग
थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को बिना जांच के रक्त चढ़ाने से HIV पॉज़िटिव होने का मामला; विधायक ने स्वास्थ्य मंत्री का इस्तीफा और जिम्मेदारों की गिरफ्तारी मांगी
डुमरी/धनबाद/हजारीबाग : डुमरी विधानसभा क्षेत्र के विधायक जयराम कुमार महतो ने झारखंड के चाईबासा सदर अस्पताल में हुई ‘दुखद, दर्दनाक और चिंताजनक’ घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया है। अस्पताल में थैलेसीमिया से पीड़ित पाँच बच्चों को बिना समुचित जांच के रक्त चढ़ाने के कारण उनके एचआईवी पॉज़िटिव पाए जाने के मामले को विधायक महतो ने चिकित्सा नैतिकता का गंभीर उल्लंघन और कानूनन दंडनीय अपराध बताया है।
सरकार की कार्रवाई को बताया “छलावा”:
विधायक महतो ने इस गंभीर मामले पर राज्य सरकार द्वारा की गई कार्रवाई को ‘दिखावा’ और ‘छलावा मात्र’ करार दिया। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों को निलंबित करने की कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया, “क्या इन मासूमों की जिंदगी से खिलवाड़ की यही सजा है? ये निलंबित अधिकारी तो कुछ महीनों में निलंबन मुक्त हो जाएँगे, लेकिन बच्चों का क्या होगा?”
नौकरी से बर्खास्तगी और गिरफ्तारी की मांग:
विधायक ने मांग की है कि इस घटना के लिए प्रत्यक्ष रूप से जिम्मेवार लोगों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए और उन्हें नौकरी से बर्खास्त किया जाए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग में “जीरो टॉलरेंस” की नीति पर काम होना चाहिए, और इतनी बड़ी चूक अक्षम्य है।
स्वास्थ्य मंत्री पर भी साधा निशाना:
विधायक जयराम कुमार महतो ने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को ‘पूर्णतः ध्वस्त’ बताते हुए स्वास्थ्य मंत्री पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी चूक पर स्वास्थ्य मंत्री को खुद विचार करना चाहिए कि वे पद पर बने रहें या खुद को पदमुक्त करें। उच्च न्यायालय के मॉनिटरिंग में RIMS शासी निकाय की बैठक होने को उन्होंने ‘शर्मनाक’ करार दिया।
सचिवालय के अधिकारियों की जवाबदेही पर प्रश्न:
मुख्यमंत्री से संवेदनशील विभाग में ‘संवेदनाहीन अधिकारियों’ की पदस्थापना न करने का अनुरोध करते हुए विधायक ने सचिवालय के अधिकारियों की कार्यशैली पर भी प्रश्नचिह्न लगाया। उन्होंने कहा कि विधायक बने करीब 11 महीने हो गए, लेकिन उन्होंने नहीं सुना कि सचिवालय का कोई बड़ा अधिकारी कभी जिलों में स्वास्थ्य व्यवस्था की जांच या समीक्षा के लिए दौरा किया हो।
उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल सचिवालय में बैठने की नौकरी नहीं है, और ऐसी दुखद घटनाओं के लिए सचिवालय के बड़े अधिकारी भी उतने ही जिम्मेवार हैं जितने जिलों में पदस्थापित अधिकारी।