सत्ता पर काबिज होने के लिए राजनीतिक दल मतदाताओं और खासकर..
खाते में पैसे डाल कर सरकार बनाना परंपरा बन..
राजीनीति एक ऐसा व्यपार बन चुकी है कि हर दल इसमे हाथ धोने के लिए अंदर तक डाल देता हैं और वह हाथ खाली नजर नही आता हैं!देश में जब भी कहीं विधानसभा या लोकसभा के चुनाव होते हैं, तो सत्ता पर काबिज होने के लिए राजनीतिक दल मतदाताओं और खासकर महिलाओं के खाते में हर माह एक निश्चित राशि देने का दावा करते हैं।आज देश में कई दल यही तरीका अपना कर सत्ता में आ जाते हैं! यह एक तरह से सत्ता के लिए सौदा है। मतदाताओं के खाते में पैसे डाल कर सरकार बनाना परंपरा बन जाएगी, तो फिर जनता विकास की अपेक्षा कैसे करेगी। बेशक हमारे देश की आधी से ज्यादा आबादी आर्थिक रूप से बेहद कमजोर है, लेकिन पैसे देकर कोई भी सरकार जनता को इतना सक्षम नहीं कर सकती कि वह आत्मनिर्भर हो जाए। लोगों को सोचना होगा कि उन्हें क्या चाहिए? हर माह कुछ हजार रुपए या फिर आत्मनिर्भर जीवन ? देश के सभी जिम्मेदार राजनीतिक दलों को भी मंथन करना होगा कि पैसे बांटने की योजनाओं के कारण विकास कार्यों का कोई मोल जनता के आगे नहीं रहता है। याद रखना होगा कि जनता को चंद पैसे नहीं, जीवन उपयोगी सेवाओं की जरूरत है। तस्लीम बेनकाब
रमेश सैनी सहारनपुर इंडियन टीवी न्यूज़