सवर्ण समाज के विखंडन लाभ उठाते हैं राजनेता
कविता तिवारी
नन्दगोपाल पाण्डेय ब्यूरोचीफ सोनभद्र
राष्ट्रीय सवर्ण आर्मी भारत की राष्ट्रीय प्रचारक कविता तिवारी ने समाचार पत्रों राष्ट्रीय सवर्ण आर्मी भारत की राष्ट्रीय प्रचारक कविता तिवारी ने समाचार पत्रों बातचीत में सवर्ण समाज की अनेकता सवाल उठाते हुए कहा कि वर्तमान समय में राजनेता सवर्ण की अनेकता का लाभ उठा रहे हैं
अन्य समाज एक होकर अपना राजनैतिक दल बनाकर रखें हैं और उसी का समर्थन करते हैं जबकि सवर्ण समाज विभिन्न दलों में बिखरा हुआ नज़र आता है सवर्ण की कोई एक राजनैतिक पार्टी नहीं है सवर्ण समाज भिन्न भिन्न दलों को समर्थन देता है जिससे कोई भी राजनैतिक दल सवर्ण समाज का समर्थन नहीं करते हैं या यह कह लीजिए कि सवर्ण समाज की कोई सरकार नहीं है
सरकार चाहे जिस पार्टी की हो सवर्ण समाज के लिए कोई भी सार्थक कार्य नहीं करती है किसी भी पार्टी को सवर्ण समाज की आवाज उठाने में पीड़ा महसूस होती है क्योंकि सभी वोट बैंक की राजनीति करते हैं कोई भी दल सवर्णों का नाम नहीं लेता है केवल चुनाव के समय सवर्णों की याद आती है सभी राजनैतिक दलों को।
मै तो यही कहना चाहती हूं कि सवर्ण की अनेकता के कारण ही राजनैतिक दल लाभ उठाते हैं अन्य समाज की तरह अगर सर्वण समाज भी एक होकर वोट या एक ही दल का समर्थन करे तो किसी भी सरकार को झुका सकता है।
इसलिए सवर्णों को एक जुट होकर उसी दल का समर्थन करें जो सवर्णों के लिए आवाज उठाए ।
अन्य समाज एक होकर अपना राजनैतिक दल बनाकर रखें हैं और उसी का समर्थन करते हैं जबकि सवर्ण समाज विभिन्न दलों में बिखरा हुआ नज़र आता है सवर्ण की कोई एक राजनैतिक पार्टी नहीं है सवर्ण समाज भिन्न भिन्न दलों को समर्थन देता है जिससे कोई भी राजनैतिक दल सवर्ण समाज का समर्थन नहीं करते हैं या यह कह लीजिए कि सवर्ण समाज की कोई सरकार नहीं है
सरकार चाहे जिस पार्टी की हो सवर्ण समाज के लिए कोई भी सार्थक कार्य नहीं करती है किसी भी पार्टी को सवर्ण समाज की आवाज उठाने में पीड़ा महसूस होती है क्योंकि सभी वोट बैंक की राजनीति करते हैं कोई भी दल सवर्णों का नाम नहीं लेता है केवल चुनाव के समय सवर्णों की याद आती है सभी राजनैतिक दलों को।
मै तो यही कहना चाहती हूं कि सवर्ण की अनेकता के कारण ही राजनैतिक दल लाभ उठाते हैं अन्य समाज की तरह अगर सर्वण समाज भी एक होकर वोट या एक ही दल का समर्थन करे तो किसी भी सरकार को झुका सकता है।
इसलिए सवर्णों को एक जुट होकर उसी दल का समर्थन करें जो सवर्णों के लिए आवाज उठाए ।