सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला – अब हर गिरफ्तारी में लिखित आधार बताना अनिवार्य
सुभाषणी बोहत एडवोकेट ने सुप्रीम कोर्ट का आभार व्यक्त किया
नई दिल्ली। सुभाषिनी बोहत एडवोकेट ने सुप्रीम कोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि अब देश में नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा और पारदर्शिता की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि अब किसी भी व्यक्ति की गिरफ्तारी बिना लिखित आधार बताए नहीं की जा सकेगी।
सुभाषिनी बोहत एडवोकेट ने बताया कि अदालत ने अपने निर्णय में कहा है कि गिरफ्तारी करने वाले अधिकारी को आरोपी को गिरफ्तारी के कारणों का लिखित उल्लेख देना अनिवार्य होगा। यह आदेश नागरिक स्वतंत्रता की रक्षा और पुलिस की जवाबदेही तय करने वाला मील का पत्थर सिद्ध होगा।
सुभाषिनी बोहत एडवोकेट ने कहा कि न्यायमूर्ति शशिकांत शर्मा की अध्यक्षता वाली पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 21 और 22 का हवाला देते हुए कहा कि हर व्यक्ति को जीवन और स्वतंत्रता का अधिकार प्राप्त है। अतः किसी भी व्यक्ति की गिरफ्तारी मनमाने ढंग से नहीं की जा सकती। यदि गिरफ्तारी के दो घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के समक्ष गिरफ्तारी का लिखित आधार प्रस्तुत नहीं किया गया, तो वह गिरफ्तारी अवैध मानी जाएगी।
सुभाषिनी बोहत एडवोकेट ने आगे कहा कि पुलिस को अब हर गिरफ्तारी से पूर्व एक लिखित रिपोर्ट तैयार करनी होगी, जिसमें गिरफ्तारी का कारण, साक्ष्य और कानूनी प्रावधान स्पष्ट रूप से लिखे होंगे। ऐसा न होने की स्थिति में गिरफ्तार व्यक्ति को तुरंत रिहा करने के निर्देश भी सुप्रीम कोर्ट ने दिए हैं।
सुभाषिनी बोहत एडवोकेट ने इस फैसले को न्यायिक पारदर्शिता और नागरिक अधिकारों की मजबूती की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया और कहा कि अब आम नागरिक को न्यायिक संरक्षण और संवैधानिक सुरक्षा और अधिक सशक्त रूप से प्राप्त होगी।
सुभाषिनी बोहत एडवोकेट ने अंत में सुप्रीम कोर्ट के प्रति गहरा आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह निर्णय देश के हर नागरिक के लिए न्याय और समानता की भावना को मजबूत करेगा तथा पुलिस और प्रशासनिक प्रणाली में जवाबदेही की नई परंपरा स्थापित करेगा।