नरेश सोनी इंडियन टीवी न्यूज नेशनल ब्यूरो हजारीबाग
हटकोना नदी पर पुल निर्माण की मांग तेज: ‘आज़ादी के सात दशक बाद भी लकड़ी के सहारे पार करते हैं ग्रामीण’
नव झारखण्ड फाउंडेशन ने उपायुक्त को लिखा पत्र; बारिश में थम जाता है जीवन
हजारीबाग। कटकमसांडी प्रखंड की हटकोना नदी पर स्थायी पुल के निर्माण की वर्षों पुरानी मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। नव झारखण्ड फाउंडेशन (रजि.) ने इस गंभीर समस्या को लेकर हजारीबाग के उपायुक्त (DC) को एक भावुक पत्र लिखा है, जिसमें पुल न होने के कारण ग्रामीणों को हर साल होने वाली पीड़ा का विस्तृत ब्यौरा दिया गया है।
मानसून में अभिशाप बन जाती है नदी
नव झारखण्ड फाउंडेशन के केंद्रीय अध्यक्ष किशोरी राणा द्वारा लिखे गए इस पत्र में कहा गया है कि हटकोना नदी आज़ादी के बाद से आज तक इस क्षेत्र के सैकड़ों ग्रामीणों के लिए एक अभिशाप बनी हुई है। बारिश के दिनों में नदी उफनाने पर पूरा इलाका देश के बाकी हिस्सों से पूरी तरह कट जाता है।
पत्र के अनुसार, सबसे ज़्यादा प्रभावित बच्चे, गर्भवती महिलाएं और गंभीर रूप से बीमार मरीज होते हैं।
शिक्षा बाधित: बारिश के दौरान बच्चे स्कूल नहीं जा पाते हैं।
स्वास्थ्य संकट: नदी पार करने में असमर्थ होने के कारण कई गर्भवती महिलाओं और बीमार व्यक्तियों की एंबुलेंस नदी के पार ही रुक जाती है, जिससे उनकी जान पर बन आती है।
अस्थायी व्यवस्था: ग्रामीण जान जोखिम में डालकर लकड़ी के पुल या अस्थायी नाव के सहारे नदी पार करने को मजबूर हैं।
व्यवस्था की असफलता का प्रतीक
किशोरी राणा ने पत्र में ज़ोर दिया है कि आज़ादी के सात दशक बाद भी लोगों का इस तरह की मूलभूत सुविधा से वंचित रहना ‘केवल एक समस्या नहीं, बल्कि व्यवस्था की असफलता का प्रतीक है।’
उन्होंने उपायुक्त महोदय से विनम्र अपील की है कि इस जनहित के मुद्दे को अत्यंत प्राथमिकता में लेते हुए हटकोना नदी पर स्थायी पुल निर्माण की स्वीकृति प्रदान की जाए।
विकास की नई किरण की उम्मीद: फाउंडेशन का मानना है कि यह पुल सिर्फ सीमेंट और लोहे की संरचना नहीं होगा, बल्कि यह क्षेत्र के हज़ारों लोगों के जीवन में उम्मीद, विकास और सुरक्षा की नई किरण लेकर आएगा। फाउंडेशन ने विश्वास जताया है कि उपायुक्त के संवेदनशील नेतृत्व में हटकोना के लोगों का यह लंबित सपना जल्द साकार होगा और वे भी गर्व से खुद को विकास की मुख्यधारा में शामिल कह सकेंगे।