इंडिया टीवी ब्यूरो चीफ राजेश मौर्य कुशीनगर
नेबुआ नौरंगिया ब्लॉक के ढोलहा गांव के गुलहरिया टोला में तीन बच्चों की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग को अंदेशा था कि डेंगू, मलेरिया या टायफाइड हुआ होगा। गांव में बच्चों के परिजनों के अलावा 26 लोगों के खून की जांच रैपिड किट से कराई गई तो रिपोर्ट निगेटिव आया। इसके बाद सैंपल बीआरडी मेडिकल कॉलेज जांच के लिए भेजा गया है।
गुलहरिया टोले में तीन बच्चों की मौत के बाद जिम्मेदार चौकन्ना हो गए हैं। गांव में पूरे दिन स्वास्थ्य विभाग की टीम के अलावा अफसरों का आना-जाना लगा रहा। गांव के अधिकांश लोगों को गांव से बाहर नहीं जाने दिया। सीएमओ ने बताया कि जिन बच्चों की मौत हुई है, उनका और जो बीमार हैं, उनका एक जैसा ही लक्षण है। मृत कृष का खून का सैंपल तो बीआरडी भेजा गया है, बाकी 18 मरीजों का भी सैंपल जांच के लिए शनिवार को भेजा गया।
डीएम को भेजे गए रिपोर्ट में सीएमओ ने कहा कि गांव में चारों तरफ गंदगी फैली है। देसी नल का पानी सभी लोग पी रहे हैं, दरवाजे पर गड्ढा खोदकर घर का पानी बहा रहे हैं। इससे जलजनित बीमारियों के फैलने की ज्यादा संभावना है। सीडीओ वंदिता श्रीवास्तव ने बताया कि गांव से लेकर सीएचसी तक स्वास्थ्य विभाग की टीम को कैंप करने का निर्देश दिया गया है।
गांव में एंबुलेंस खड़ी करा दी गई है, अगर किसी को बुखार या सेहत से जुड़ी कोई तकलीफ होती है तो उसे एंबुलेंस से सीएचसी लेकर लोग जाएंगे। इसके लिए प्रधान, सचिव को भी निर्देश दिया गया है। बच्चों के डॉक्टर पूरी टीम के साथ कैंप करेंगे। इसके लिए तीन टीम बनाई गई है, एक टीम आठ घंटे गांव में रहेगी।
सचिव से मांगा स्पष्टीकरण
तीन बच्चों की मौत के बाद गांव में सफाई के लिए 25 सफाईकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है। दोपहर में डीपीआरओ आलोक प्रियदर्शी पहुंचे। गांव में गंदगी देख नाराजगी जाहिर करते हुए सचिव को फटकार लगाया और सफाई व्यवस्था ठीक करने का निर्देश दिया। गांव में अतिरिक्त सफाईकर्मियों की ड्यूटी लगाया गया है। सचिव से स्पष्टीकरण मांगा गया है।
तीनों मासूमों की मौत स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के कारण हुई है। आशा या एएनएम ने बच्चों की बीमारी की जानकारी उच्च अधिकारियों तक पहुंचाई होती तो टीम समय पर गांव में पहुंची होती।
– रब्बूल
गांव में स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव हमेशा से रहा है, लेकिन इस घटना ने इसकी कमी को और उजागर कर दिया है। गांव में सफाई कभी नहीं होती है, नाली की व्यवस्था नहीं है।
राजू
स्वास्थ्य विभाग ही नहीं, पंचायत राज विभाग की लापरवाही भी बच्चों की मौत की बड़ी वजह है। गांव में नालियों की सफाई महीनों से नहीं हुई है। कई जगह नालियां जाम पड़ी हैं।
मुन्ना लारी
आशा कार्यकर्ता का गांव में नियमित आना बंद है। रिपोर्ट पूर्ति के लिए कभी-कभार सरकारी प्राथमिक विद्यालय पर दिख जाती है, लेकिन बीमार लोगों का हालचाल लेने की जिम्मेदारी को नजरअंदाज कर देती है।
हारून
गांव में सफाई कराने का निर्देश डीपीआरओ को दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग की टीम को जब तक गांव में बच्चों का बुखार ठीक नहीं होता है, तब तक कैंप करने का निर्देश दिया गया है। स्थानीय स्तर पर खून के सैंपल की जांच कराई गई, रिपोर्ट निगेटिव आई है। दोबारा जांच के लिए बीआरडी गोरखपुर सैंपल भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद उस आधार पर आगे का उपचार डॉक्टरों की टीम करेगी।
-वंदिता श्रीवास्तव, सीडीओ