सोनभद्र। जानी-मानी कवयित्री, लेखिका और सामाजिक चिंतक डॉ. रचना तिवारी के नए कविता “संग्रह सपनों की उम्र नहीं होती “का लोकार्पण 16 जनवरी को नई दिल्ली के विश्व पुस्तक मेले के लेखक मंच पर संपन्न हुआ। हिंदी के गणमान्य लेखकों और संस्कृतिकर्मियों ने पुस्तक का लोकार्पण किया।
डॉ. तिवारी पिछले तीन दशकों से हिंदी साहित्य में सक्रिय हैं। उनके पूर्व प्रकाशनों में “झील में उतरी नाव”, “कुछ प्रेम मिलने के लिए नहीं होते” और “मेरे गीत तुम्हीं से जन्मे” जैसे कविता, गजल व मुक्तक संग्रह शामिल हैं। हिंदी कविता के सौंदर्यबोध और विमर्शों पर शोध करने वाली डॉ. तिवारी आलोचक के रूप में भी विख्यात हैं तथा काव्य मंचों पर लोकप्रिय हस्ताक्षर हैं। देश के अनेक राष्ट्रीय मंचों पर उनके कविता पाठ ने साहित्य जगत में हलचल पैदा की है।
हिंदी के जाने माने आलोचक डॉ. ओम निश्चल ने कहा कि रचना तिवारी के गीतों की पृष्ठभूमि में सामाजिक समस्याएं और जीवन की विडंबनाएं बेबाकी से उजागर होती हैं। छंदबद्ध रचना में उनकी महारत और श्रोताओं से गहरा जुड़ाव सराहनीय है। डॉ. तिवारी को साहित्य रचना के लिए विभिन्न राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। लोकार्पण समारोह और शांति-समरसता को समर्पित कवि सम्मेलन में उनके गीतों ने समां बांध दिया।
विश्व पुस्तक मेले के दौरान उत्तर प्रदेश के श्रम एवं रोजगार मंत्री अनिल राजभर ने सर्वभाषा ट्रस्ट के स्टॉल का दौरा किया। इस अवसर पर सोनभद्र की सुप्रसिद्ध लेखिका डॉ. रचना तिवारी ने उन्हें अपनी नवीन पुस्तक की प्रति भेंट की। मंत्री ने कविताओं की सराहना करते हुए इसे मानवता हित में सर्जनात्मक अवदान बताया।
सोनभद्र/दुद्धी (विवेक सिंह)