वाराणसी से प्रवीण मिश्रा की रिपोर्ट।।
क्या आप जानते हैं?
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट (Writ Petition Cr. No. 402/2024, दिनांक 04.10.2024) ने एक ऐसे मामले पर सुनवाई की, जहाँ एक पत्रकार पर सिर्फ सच लिखने की वजह से FIR कर दी गई थी।
पत्रकार ने सिस्टम की गड़बड़ी उजागर की।
जवाब में उस पर झूठा केस बना दिया गया।
लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा —
“ऐसे मामलों में FIR का दुरुपयोग नहीं होने दिया जाएगा।”
यह लोकतंत्र की जीत है!
पत्रकार = लोकतंत्र का चौथा स्तंभ
भारत के संविधान में:
पहला स्तंभ – विधायिका (Parliament)
दूसरा – कार्यपालिका (Government)
तीसरा – न्यायपालिका (Court)
चौथा – मीडिया / पत्रकार
अगर पत्रकार चुप हो जाएँ, तो:
भ्रष्टाचार छिप जाएगा
गरीब की आवाज दब जाएगी
बैंक, अफसर, नेता मनमानी करेंगे
आज क्या हो रहा है?
आज देश में:
जो सच बोले, उस पर केस
जो सवाल करे, उसे धमकी
जो घोटाला उजागर करे, उस पर FIR
यह लोकतंत्र नहीं, तानाशाही की शुरुआत है।
सुप्रीम कोर्ट का साफ संदेश
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा:
FIR डराने का हथियार नहीं बन सकती
अभिव्यक्ति की आज़ादी अपराध नहीं है
पत्रकारों को दबाया नहीं जा सकता
यह फैसला हर नागरिक के हक की रक्षा है।
जनता से अपील
आज अगर पत्रकार चुप हो गया, तो कल आपकी आवाज भी बंद हो जाएगी।
इसलिए:
सच्चे पत्रकारों का साथ दें
फर्जी केस का विरोध करें
सच बोलने वालों की रक्षा करें
याद रखो…
“जिस देश में पत्रकार डर जाएँ,
वहाँ जनता गुलाम बन जाती है।”
सुप्रीम कोर्ट ने साबित कर दिया — सच अभी जिंदा है।।