सहारनपुर बेहट कस्बे में स्थित मोहल्ला मनिहारान एक साधारण-सा इलाका है, जहाँ साधारण घरों में असाधारण सपने पलते हैं। इन्हीं में से एक है 13 वर्षीय हुस्ना, अरशद की बेटी। गरीबी की मार झेलते इस परिवार ने हुस्ना को कभी पढ़ाई से रोका नहीं। प्राइमरी स्कूल से सरकारी जूनियर हाईस्कूल तक का सफर तय करते हुए हुस्ना ने न सिर्फ अपनी कक्षा में अव्वल स्थान हासिल किया, बल्कि एक भी दिन छुट्टी नहीं ली। उसकी मेहनत और लगन ने पूरे मोहल्ले का दिल जीत लिया है।
बचपन से संघर्ष की कहानी
हुस्ना का जन्म एक ऐसे परिवार में हुआ जहाँ रोजी-रोटी कमाने के लिए पिता अरशद रोज मजदूरी करते हैं। घर में आय का कोई निश्चित स्रोत नहीं, फिर भी हुस्ना ने किताबों को अपना साथी बना लिया। सुबह जल्दी उठकर पढ़ाई, स्कूल जाना, शाम को घर के छोटे-मोटे काम निभाना – यह उसका दैनिक रूटीन है। शिक्षकों बताते हैं कि हुस्ना क्लास में हमेशा सबसे आगे रहती है। उसके सवाल इतने गहरे और बुद्धिमान होते हैं कि पूरा क्लास चुप हो जाता है। सरकारी स्कूल में ऐसी बच्ची मिलना दुर्लभ है, जो न तो मोबाइल की लालच में फँसी, न ही दोस्तों के साथ खेलने के बहाने पढ़ाई छोड़ी।
सम्मान की झलक, प्रेरणा की मिसाल
पिछले साल स्कूल के वार्षिक समारोह में हुस्ना को खास सम्मान मिला। 100% उपस्थिति, उत्कृष्ट प्रदर्शन और इंटेलीजेंट सवालों के लिए उसे ट्रॉफी से नवाजा गया। इसके साथ ज्योमेट्री बॉक्स, साइंस किट, किताबें, पेंसिल बॉक्स और स्टेशनरी सामग्री भेंट की गई। प्रिंसिपल ने कहा, “हुस्ना जैसे बच्चे देश का भविष्य हैं।” यह सम्मान न सिर्फ हुस्ना के लिए, बल्कि पूरे परिवार और मोहल्ले के लिए गर्व का विषय बना। लेकिन यह खुशी ज्यादा दिन नहीं रही। अब 9वीं कक्षा के एडमिशन का समय आ गया है, और गरीबी फिर से दीवार बन गई है। फीस, किताबें, यूनिफॉर्म, बैग – ये छोटे-छोटे खर्च परिवार के लिए बोझ बन गए हैं।
गरीबी का काला साया
हुस्ना स्कूल जाना चाहती है, डॉक्टर या टीचर बनने का सपना देखती है। लेकिन परिवार की आर्थिक तंगी सब कुछ रोक रही है। माँ शाम को सिलाई का काम करती हैं, पिता की मजदूरी मौसम पर निर्भर है। BPL कार्ड तो है, लेकिन सरकारी योजनाओं की जानकारी नहीं। RTE अधिनियम के तहत 6-14 साल तक मुफ्त शिक्षा का अधिकार है, UP मुफ्त शिक्षा योजना में 1-12 कक्षा तक फीस-किताबें मुफ्त मिलती हैं, फिर भी प्रक्रिया जटिल लगती है। परिवार को आधार कार्ड, जन्म प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र जुटाने में ही परेशानी हो रही है। हुस्ना की आँखों में सपने हैं, लेकिन चेहरे पर चिंता साफ झलकती है।
समाज की जिम्मेदारी और समाधान के रास्ते
हुस्ना की कहानी अकेली नहीं है। उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में हजारों ऐसी मेधावी लड़कियाँ गरीबी से जूझ रही हैं। लेकिन उम्मीद की किरणें भी हैं:
प्रेरणा का संदेश
हुस्ना की मेहनत हमें सिखाती है कि गरीबी दीवार नहीं, सीढ़ी बन सकती है। अगर समाज थोड़ा हाथ बढ़ाए, तो यह लड़की न सिर्फ अपना, बल्कि पूरे परिवार का जीवन बदल देगी। बेहट के लोग, सहारनपुरवासी भाइयों-बहनों – हुस्ना को मौका दीजिए। वह डॉक्टर बनेगी, टीचर बनेगी, या जो भी बनेगी, देश का नाम रोशन करेगी।
हुस्ना, तू हार मत मानना। तेरी ट्रॉफी तो बस शुरुआत है, असली पुरस्कार तो आगे है। आगे बढ़, बेटी! देश तेरी राह देख रहा है। हिना कौशर
रमेश सैनी सहारनपुर इंडियन टीवी न्यूज़