फतेहगंज पश्चिमी, बरेली। अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान अधिशासी अधिकारी (ईओ) पुष्पेंद्र राठौर और व्यापारी नेता के बीच हुए चर्चित विवाद की जांच आखिरकार पूरी हो गई है। तीन सदस्यीय जांच समिति ने अपनी छह पन्नों की रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंप दी है, जिसमें सनसनीखेज आरोपों की पोल खुल गई है। रिपोर्ट में न तो ईओ द्वारा दो लाख रुपये की रिश्वत मांगने की पुष्टि हुई है और न ही व्यापारी नेता द्वारा कार्यालय में घुसकर सरकारी कागजात फाड़ने या धमकाने की घटना प्रमाणित हो सकी है।
एडीएम प्रशासन पूर्णिमा सिंह, एडीएम न्यायिक देश दीपक सिंह एवं एसपी नॉर्थ मुकेश चंद्र मिश्रा द्वारा की गई संयुक्त जांच में 9 जनवरी को मौके पर निरीक्षण व गहन पूछताछ की गई। शिकायतकर्ता व्यापारी नेता आशीष अग्रवाल के बयान लिए गए, लेकिन रिश्वत मांगने के आरोपों के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य सामने नहीं आया। हालांकि, मौके पर मौजूद कुछ व्यापारियों ने अपने बयानों में ईओ द्वारा इशारों-इशारों में दो लाख रुपये मांगने की बात कही, लेकिन इसे प्रमाणिक नहीं माना गया।
वहीं, ईओ द्वारा लगाए गए इस गंभीर आरोप कि व्यापारी नेता ने कार्यालय में घुसकर अभद्रता की और सरकारी दस्तावेज फाड़ दिए, जांच में कमजोर साबित हुए। कार्यालय कर्मचारियों ने स्पष्ट कहा कि आशीष अग्रवाल के ईओ कक्ष में जाने, फाइल फाड़ने, गाली-गलौज या धमकी देने जैसी किसी भी घटना को उन्होंने नहीं देखा।
जांच के दौरान एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि कार्यालय में सीसीटीवी कैमरे लगे होने के बावजूद कोई फुटेज उपलब्ध नहीं कराई गई। बताया गया कि कैमरों का एक्सेस चेयरमैन के दामाद हारून के पास है। ईओ द्वारा भी सीसीटीवी फुटेज प्रस्तुत न किए जाने से उनके आरोपों को बल नहीं मिल सका।
समिति ने निष्कर्ष में स्पष्ट किया कि व्यापारी नेता आशीष अग्रवाल द्वारा ईओ पर लगाए गए रिश्वत मांगने के आरोप अपुष्ट और बलहीन हैं, जबकि ईओ द्वारा व्यापारी नेता पर लगाए गए दस्तावेज फाड़ने व धमकाने के आरोप भी प्रथमदृष्टया अप्रमाणित पाए गए हैं। जांच रिपोर्ट को जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने 4 फरवरी को प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री को भेज दिया है।
जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद व्यापारी नेता आशीष अग्रवाल ने आरोप लगाया कि ईओ ने पद का दुरुपयोग कर उनके खिलाफ फर्जी मुकदमा दर्ज कराया है। उन्होंने प्रशासन से फर्जी मुकदमा तत्काल समाप्त करने की मांग की है।
अब सवाल यह उठ रहा है कि जब न रिश्वत का आरोप साबित हुआ और न ही फाइल फाड़ने का, तो आखिर यह पूरा विवाद किसके इशारे पर और क्यों खड़ा किया गया? जांच रिपोर्ट ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनके जवाब अब प्रशासन को देने होंगे।
प्रवन पाण्डेय ITN National जिला संवाददाता बरेली