जाकिर झंकार : आहवा
ब्रह्मवादिनी पूज्य हेतल दीदी का मानना है कि महाशिवरात्रि प्रत्येक जीव के लिए स्वयं को जानने की रात्रि है। यदि हर जीव सादगी, सरलता, समता और समझदारी के साथ सत्य सनातन के मार्ग पर साधना करे, तो महाशिवरात्रि एक ऐसा पर्व है जिसमें मात्र एक रात्रि में जीव ‘शिवत्व’ को प्राप्त कर सकता है।
इसी विश्वास के साथ, हर वर्ष तेजस्विनी संस्कृति धाम में महाशिवरात्रि का पर्व एक अनोखी परंपरा के साथ मनाया जाता है। इस अवसर पर आयोजित त्रि-दिवसीय साधना के मुख्य अंश निम्नलिखित रहे:
वैदिक अनुष्ठान: आचार्य श्री केतन दादा के सानिध्य में नौ वैदिक ऋचाओं के ज्ञाता भूदेवों द्वारा नवचंडी यज्ञ, होमात्मक लघुरुद्र यज्ञ और पाठ्यात्मक वेदों की ऋचाओं का गान किया गया।
शिव स्तुति: भगवान शिव की विभिन्न स्तुतियों और पार्थिव शिवलिंग के निर्माण से पूरा वातावरण शिव-तत्व की गूँज से सराबोर हो गया।
आंतरिक ऊर्जा और ध्यान: रात्रि के प्रहर के दौरान परम पूज्य हेतल दीदी ने ध्यानात्मक शरीर की आंतरिक ऊर्जा के विषय में मार्गदर्शन दिया।
कुंडलिनी जागरण: योग के माध्यम से शिवत्व प्राप्त करने के लिए सुबह चार बजे तक कुंडलिनी जागरण के प्रयोग कराए गए।