रिपोर्टर: जाकिर झंकार, आहवा
सरकारी विनययन एवं वाणिज्य कॉलेज, वघई में प्राचार्य डॉ. जे.एम. भोया के मार्गदर्शन और अध्यक्षता में ‘सप्तधारा’ परियोजना के तहत ‘ज्ञानधारा’ के अंतर्गत “विश्व मातृभाषा दिवस” अत्यंत उत्साह के साथ मनाया गया।
मुख्य वक्ता का संबोधन
इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में सरकारी विनययन एवं वाणिज्य कॉलेज, बांसदा के गुजराती विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर बी.डी. गामित उपस्थित रहे। उन्होंने अपने व्याख्यान में निम्नलिखित बिंदुओं पर प्रकाश डाला
मातृभाषा का उद्भव और महत्व: उन्होंने मातृभाषा की उत्पत्ति और उसके गौरवशाली इतिहास के बारे में बताया।
साहित्यिक योगदान: कवि प्रेमानंद, अखो, उमाशंकर जोशी और पन्नालाल पटेल जैसे महान साहित्यकारों के विचारों के माध्यम से गुजराती भाषा की महत्ता समझाई।
उन्होंने “जननी की जोड़ सखी नहीं जड़े लोल” और “जहाँ-जहाँ बसे गुजराती, वहाँ-वहाँ सदाकाल गुजरात” जैसी प्रसिद्ध पंक्तियों के जरिए विद्यार्थियों को अपनी भाषा पर गर्व करने की प्रेरणा दी।
विश्व मातृभाषा दिवस के इस उपलक्ष्य में कॉलेज के प्रथम वर्ष की छात्राओं, गावित जिनल और कुंवर सेजल ने ‘जय सोमनाथ, जय द्वारकाधीश यश गाथा गुजरात की’ नामक सुंदर गौरव गान प्रस्तुत किया।
इस कार्यक्रम में कॉलेज के सभी प्राध्यापक और छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहीं। पूरे कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. विजय खांडरा द्वारा किया गया।