रीवा ब्यरो चीफ रिप्पू पाण्डेय
एक हंसती-खेलती जिंदगी, सात फेरों के सात वचन और फिर चंद महीनों में मौत का मातम। शिखा की आत्महत्या ने कई सवाल खड़े किए थे, लेकिन अब जो वायरल ऑडियो सामने आया है, उसने पूरे मामले में आग लगा दी है। निज सहायक पुष्पेंद्र गौतम का एक कथित ऑडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वो शिखा के पति विकास पांडे को खुलेआम धमकी दे रहा है। वो कह रहा है- ‘बचा लो’, ‘रिकॉर्ड कर लो’, ‘पुलिस के पास चले जाओ’। आखिर ये आत्मविश्वास कहां से आ रहा है? आज हम इसी वायरल ऑडियो की परतें खोलेंगे। “बचा सको तो बचा लो” ये शब्द किसी फिल्म के विलेन के नहीं, बल्कि उस पुष्पेंद्र गौतम के बताए जा रहे हैं, जिस पर अब उंगलियां उठनी शुरू हो गई हैं। शिखा की मौत के बाद एक के बाद एक दो ऑडियो क्लिप्स ने पुलिस की तफ्तीश पर सवालिया निशान लगा दिया है। वायरल ऑडियो में सुना जा सकता है कि कैसे पुष्पेंद्र, शिखा के पति विकास पाण्डेय को धमका रहा है। वो न सिर्फ बदतमीजी कर रहा है, बल्कि उसे पुलिस और कानून का डर तक नहीं है। सवाल ये है कि आखिर एक बाहरी शख्स, एक नवविवाहिता के परिवार में इतनी दखल अंदाजी क्यों कर रहा था? क्यों वो बार-बार फोन करके विकास को उकसा रहा था?
हैरान करने वाली बात ये है कि इस मामले में FIR दर्ज होने में एक महीने की देरी हुई। क्या ये देरी किसी दबाव का नतीजा थी? आज तीन लोग सलाखों के पीछे जरूर हैं, लेकिन क्या असली मास्टरमाइंड अभी भी बाहर है? पुष्पेंद्र गौतम के हौसले ये बता रहे हैं कि उसे शायद किसी का संरक्षण प्राप्त है अब मांग उठ रही है कि पुलिस सिर्फ ऑडियो सुनकर न बैठ जाए। जनता पूछ रही है— क्या पुष्पेंद्र गौतम की Call Details (CDR) निकाली जाएगी? क्या उसकी Location और शिखा की मौत के वक्त की कड़ियां जोड़ी जाएंगी? आखिर वो कौन सी वजह थी जिसने एक नई नवेली दुल्हन को मौत चुनने पर मजबूर कर दिया?
वायरल ऑडियो का दूसरा पार्ट अब सबके सामने है। ये चीख-चीख कर कह रहा है कि दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली है। अगर पुलिस निष्पक्ष जांच करना चाहती है, तो पुष्पेंद्र गौतम की भूमिका, उसके फोन कॉल्स और विकास पाण्डेय के घर बार-बार फोन करने की वजह को खंगालना होगा। सच सामने आना चाहिए, ताकि शिखा को इंसाफ मिल सके।
नोट/ मै उपरोक्त वायरल आडियो की पुष्टि नहीं करता हूं