मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले में मंडी प्रशासन की लापरवाही और व्यापारियों की मनमानी चरम पर है। अपनी खून-पसीने की फसल लेकर पहुंचा अन्नदाता मंडी की चौखट पर मायूस खड़ा है, लेकिन उसे न सही दाम मिल रहा है, न सम्मान।
एक ही माल, दो भाव – किसान के सब्र का बांध टूटा
13 तारीख को मंडी में व्यापारियों की खुली तानाशाही सामने आई। एक ही किसान की एक ट्रॉली 3500 रुपये प्रति क्विंटल बिकी, जबकि दूसरी ट्रॉली उसी माल की 3300 रुपये प्रति क्विंटल में खरीदी गई। इस अन्याय को देखकर किसान का गुस्सा फूट पड़ा। गुस्से में उसके मुंह से गाली निकल गई, तो व्यापारियों ने बदले की भावना से पूरा अनाज खरीदना ही बंद कर दिया।
किसान मजबूर, प्रशासन बेबस
व्यापारियों के इस अमानवीय रवैये से भड़के किसानों ने मंडी सचिव कार्यालय का किसान इकट्ठा हो गए हालात बिगड़ते देख पुलिस फोर्स को मौके पर बुलाना पड़ा। बड़ी मुश्किल से किसानों को समझा-बुझाकर और मंडी प्रशासन के दखल के बाद फिर से खरीदारी शुरू कराई गई।
सवाल ये है कि जब तक पुलिस न आए, क्या अन्नदाता को उसका हक नहीं मिलेगा? मंडी में न कोई नियम है, न व्यापारियों पर लगाम। मनमाने दाम, तानाशाही भरा व्यवहार और प्रशासन की चुप्पी – तीनों ने मिलकर किसानों को मानसिक और शारीरिक रूप से तोड़ दिया है।
अन्नदाता की मेहनत का ये अपमान कब तक?
जिला गुना से व्यूरो चीफ गोलू सेन की रिपोर्ट