राजेश कुमार तिवारी इंडियन टीवी न्यूज़
कटनी। एक ओर जहां शासन-प्रशासन हर घर नल-जल योजना के जरिए गांव-गांव तक पानी पहुंचाने के दावे कर रहा है, वहीं दूसरी ओर जिले के रीठी तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत नेगवा के खुसरा गांव की तस्वीर इन दावों की हकीकत बयां कर रही है। आजादी के दशकों बाद भी यहां के ग्रामीण बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं।
प्रकृति के भरोसे जीवन
घने जंगलों के बीच बसे इस गांव में न तो हैंडपंप की सुविधा है और न ही नल-जल योजना का कोई लाभ पहुंच सका है। हालात ऐसे हैं कि ग्रामीण आज भी चट्टानों के नीचे से टपकने वाले पानी पर निर्भर हैं। यही पानी उनकी प्यास बुझाता है और रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करता है।
“भगवान शंकर की कृपा” मानते हैं ग्रामीण
गांव के लोगों का कहना है कि चट्टानों से लगातार निकलने वाला यह पानी भगवान शंकर का आशीर्वाद है, जो वर्षों से उनकी जिंदगी का सहारा बना हुआ है। लेकिन आस्था के सहारे जीवन यापन करना उनकी मजबूरी भी बन चुकी है।
विकास के दावों पर सवाल
सरकारी योजनाओं और विकास के दावों के बीच खुसरा गांव की स्थिति कई सवाल खड़े करती है। जब पूरे प्रदेश में जल सुविधाओं को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, तब इस गांव तक बुनियादी सुविधाएं क्यों नहीं पहुंच पाई हैं, यह चिंताजनक है।
हर साल बनती है खबर, हल नहीं
ग्रामीणों का कहना है कि उनकी समस्या हर साल सुर्खियां बनती है, योजनाएं भी बनती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस काम नजर नहीं आता।
अब प्रशासन की जिम्मेदारी
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर कब तक खुसरा गांव के लोग इस तरह प्राकृतिक स्रोतों के भरोसे जीवन बिताने को मजबूर रहेंगे। अब देखना होगा कि प्रशासन इस दिशा में कब ठोस कदम उठाता है और इन ग्रामीणों को बुनियादी सुविधाएं कब तक मिल पाती हैं।।