राजेश कुमार तिवारी इंडियन टीवी न्यूज़
कटनी। अक्षय तृतीया के अबूझ मुहूर्त पर जिले में संभावित बाल विवाह की रोकथाम के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट रहा। कलेक्टर आशीष तिवारी के निर्देश पर गठित कोर ग्रुप की सजगता के चलते कटनी शहर में 1 और ढीमरखेड़ा क्षेत्र में 2 बाल विवाहों को समय रहते रुकवा दिया गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गुप्त सूचनाओं पर त्वरित कार्रवाई करते हुए प्रशासनिक और पुलिस टीम मौके पर पहुंची और तीनों स्थानों पर हो रहे बाल विवाहों को रुकवाते हुए परिजनों को सख्त चेतावनी दी। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के तहत यह दंडनीय अपराध है।
मजबूत रणनीति से मिली सफलता
कलेक्टर के निर्देश पर इस वर्ष बाल विवाह रोकने के लिए बहुस्तरीय कार्ययोजना बनाई गई थी। एसडीएम की अध्यक्षता में 5 सदस्यीय कोर टीम का गठन किया गया, साथ ही जिला और विकासखंड स्तर पर कंट्रोल रूम स्थापित कर निगरानी तंत्र को मजबूत किया गया। इसी सक्रियता के चलते समय रहते कार्रवाई संभव हो सकी।
कटनी शहर में संयुक्त टीम की कार्रवाई
कटनी के आधार कॉलोनी में 18 वर्ष से कम आयु की बालिका का विवाह कराया जा रहा था। सूचना मिलते ही महिला एवं बाल विकास विभाग और कोतवाली पुलिस की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची। जांच में बालिका की आयु 16 वर्ष और बालक की आयु 22 वर्ष पाई गई। टीम ने परिजनों, बारातियों और आयोजन से जुड़े लोगों को कानून की जानकारी देते हुए विवाह रुकवाया। समझाइश के बाद परिजन बालिका के बालिग होने के बाद ही विवाह करने पर सहमत हो गए।
ढीमरखेड़ा में दो बाल विवाह पर रोक
विकासखंड ढीमरखेड़ा के ग्राम संकुई में दो नाबालिग बालकों के विवाह की तैयारी चल रही थी। टीम ने मौके पर पहुंचकर पाया कि दोनों बालकों की आयु 21 वर्ष से कम है। अधिकारियों ने परिजनों को समझाइश दी कि 21 वर्ष से कम आयु में विवाह करना कानूनन अपराध है। मौके पर पंचनामा तैयार किया गया और परिजन बालकों के वैधानिक आयु पूर्ण होने के बाद ही विवाह करने पर राजी हुए।
प्रशासन की अपील
जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति को रोकने में सहयोग करें और ऐसी किसी भी सूचना को तत्काल प्रशासन तक पहुंचाएं, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।