सिंगरौली मध्य प्रदेश
सिंगरौली । वेतन विसंगति एवं साप्ताहिक छुट्टी दिलाये जाने समेत अन्य मांगों को लेकर लंघाडोल थाना क्षेत्र में कार्यरत नीलकंठ इन्फ्रा कंपनी के खिलाफ सैकड़ों श्रमिको ने मोर्चा खोल कार्य का बहिष्कार करते हुये सड़क पर उतर आए। 24 घंटे के हड़ताल में कंपनी को लाखों-करोड़ों रूपये के नुकसान होने का अनुमान लगाया जा रहा है। हालांकि आज दोपहर बाद कल सोमवार की सुबह तक के लिए श्रमिक काम पर लौट आए।
लंघाडोल थाना क्षेत्र में ओबी के साथ-साथ कोयला खनन कार्य में लगी नीलकंठ इन्फ्रा कंपनी में चल रही मनमानी के खिलाफ बीते दिन शनिवार को श्रमिको का गुस्सा फूट पड़ा। श्रमिको का आरोप है कि यहां केन्द्रीय श्रम विभाग द्वारा तय किये गये कुशल-अकुशल व अर्द्धकुशल श्रमिको को निर्धारित मापदण्ड के अनुसार पारिश्रमिक भुगतान नही दिया जा रहा है और साथ ही साप्ताहिक रविवार को अवकाश भी नही दिया जाता। इसको लेकर लगातार श्रमिक नीलकंठ इन्फ्रा कंपनी के एचआर डिपार्टमेंट के समक्ष अपनी बातों को रख रहे थे, लेकिन उक्त कंपनी का एचआर डिपार्टमेंट टालमटोल करते हुये घुड़कियां भी दे रहे थे। अंतत: श्रमिको के सब्र का बांध टूट गया और शनिवार की दोपहर कोयला खनन एवं ओव्हर वर्डन कार्य के सैकड़ों श्रमिक कार्य का बहिष्कार कर सड़क पर उतर आए। मामला इतना तूल पकड़ा कि कंपनी और वर्करों के बीच कहा-सुनी, धुक्का-मुक्की शुरू हो गई। चर्चाएं यह भी है कि कंपनी में सक्रिय चर्चित रामदुलारे दुबे ने एक वाहन चालक के साथ हाथापाई कर दिया। बात यहां तक सामने आया कि रामदुलारे ने चालक की पिटाई भी कर दिया। मामला इतना गरमाया कि पुलिस को सामने आना पड़ा। स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई। हजार से ऊपर श्रमिक नीलकंठ कंपनी के दफ्तर को घेर लिया। लंघाडोल पुलिस मोर्चा संभालते हुये किसी तरह मामले को शांत कराया और आज रविवार की दोपहर तक कोल खनन, ओबी एवं कोल हाईवा वाहन के चालक करीब 60-70 प्रतिशत हड़ताल पर रहे। जिससे कंपनी को लाखों-करोड़ों रूपये का नुकसान होने का अनुमान लगाया जा रहा है। हालांकि आज दोपहर बाद तक कल सोमवार तक के लिए श्रमिक काम पर लौट गये। फिलहाल उक्त कंपनी में श्रमिको के फूटे आक्रोश को लेकर कंपनी प्रबंधन जहां सवालों के कटघर्रे में है, वहीं जिला एवं खण्ड प्रशासन की भूमिका पर भी तरह-तरह के सवाल खड़े किये जा रहे हंै।
ड्यूटी 12 घंटे, भुगतान 8 घंटे का, वर्करों का आरोप
लंघाडोल थाना क्षेत्र के कार्यरत नीलकंठ इन्फ्रा कंपनी के श्रमिको ने कई गंभीर आरोप लगाया है। सूत्र बता रहे हैं कि यहां कार्य करने वाले वर्करों को बोनस, लीव नही दिया जा रहा है और वर्करों से कार्य 12 घंटे मजदूरी 8 घंटे की दी जा रही है। वहीं नियुक्ति पत्र, उपस्थिति कार्ड, वेतन पत्रक, नही दिया जाता। इतना ही नही यह भी आरोप है कि शिकायत करने वाले कथित वर्करों को नौकरी से निकालने की धमकी दी जाती है। इसके अलावा ग्रेज्यूटी का भुगतान नही किये जाने के आरोप हैं। कंपनी में श्रम कानून लागू हैं कि नही, इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है और अब कंपनी एक नही अनेको गंभीर आरोपो में घिर गई है।
कलेक्टर का आदेश कंपनियो में बेअसर
माड़ा थाना क्षेत्र के बंधौरा इलाके में मार्च महीने में एक कंपनी में श्रमिको का गुस्सा फूटा है, जहां जमकर बवाल हुआ था। उसी दौरान कलेक्टर गौरव बैनल ने संबंधित उपखण्ड अधिकारियों के नेतृत्व में एक जांच टीम गठित कर श्रमिको की समस्याओं को सुनने के लिए शिविर लगाने के निर्देश दिया था, परंतु सूत्र बता रहे हैं कि कई उपखण्ड अधिकारियों ने कंपनियों में जाना ही उपयुक्त नही समझा और जहां जांच करने गये वहां सिर्फ नोटिस तक ही सीमित रहा। मजदूरो के बीच चर्चाएं रही कि प्रशासन कंपनियों पर मेहरवान है, सिर्फ दिखावे के लिए ही जांच पड़ताल एवं नोटिस दी जा रही है। दो महीने के दौरान क्या कार्रवाइयां की गई, इसका भी लेखा जोखा सार्वजनकि होना चाहिए।
संवाददाता आशीष सोनी