दुद्धी सोनभद्र।(विवेक सिंह)
रामलीला मंच पर आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के प्रथम दिन गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय कथा वाचक बाल व्यास मानस जी महाराज का भव्य स्वागत किया गया। कार्यक्रम में “काले कंबल वाले बाबा” के नाम से प्रसिद्ध गणेश यादव भी उपस्थित रहे। मानस जी ने कथा के दौरान सुनने वालों को अमृतवाणी से अभिभूत कर दिया और भागवत कथा के मूल उद्देश्य सदाचार एवं आत्मोन्नति बताए।
मानस जी ने कहा कि श्रीमद् भागवत कथ का उद्देश्य जीवन में सकारात्मक परिवर्तन और नैतिकता की शिक्षा देना है। जब व्यक्ति परिवर्तन को स्वीकार करता है तो भगवान उस पर प्रेम करते हैं। उन्होंने बताया कि भागवत कथा में भक्तियोग, ज्ञानयोग, वैराग्य, कर्मयोग, राजधर्म, स्त्रीधर्म और दर्शन इन सबका समावेश है। भागवत का प्रभाव इतना गहरा है कि यह रोगी को रोगों से मुक्त कर सकता है, गरीबी दूर कर सकता है और भ्रमित आत्मा को धर्म का मार्ग दिखा सकता है। उन्होंने स्कन्द महापुराण का उदाहरण देते हुए कहा कि इस तरह की कथाएँ प्रेतात्माओं को भी मुक्ति दिलाने में सक्षम हैं।
मानस जी ने आगे कहा कि भागवत का सार “भव का भूखा भाव” है अर्थात् भाव से भक्ति करने पर जीवन के बंधन दूर हो जाते हैं। भागवत सभी समाज-वर्गों के लिए समान है; यह वर्ण-व्यवस्था से परे जाकर परोपकार, सहानुभूति और समाजिक समरसता का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि भागवत सीखता है कि छोटे-छोटे व्यवहारों में अपना पन दिखाई दे: गरीबों के साथ समानता, पिछड़ों का उत्थान और सबको साथ लेकर चलना। इससे न केवल आध्यात्मिक उन्नति होती है बल्कि वैज्ञानिक दृष्टि से भी शरीर तथा मन स्वस्थ रहते हैं।
कथा से पहले आयोजक समिति और भक्तों ने आरती की। आयोजन में समिति के अध्यक्ष निरंजन जायसवाल, मुख्य यजमान संदीप तिवारी, रामलीला कमेटी अध्यक्ष कन्हैया लाल अग्रहरि, राकेश आजाद, सुमित सोनी, राजेश्वर प्रसाद श्रीवास्तव, कृष्ण कुमार, भोला अग्रहरि, रमाशंकर सिंह सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। मंच पर समिति के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता तथा अनेक महिलाएँ और पुरुष कथा का श्रवण करते दिखे।