शहजाद आलम जिला संवाददाता
सिद्धार्थनगर।
जिले के इटवा तहसील एक बार फिर भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर चर्चा में है। एंटी करप्शन टीम की लगातार कार्रवाई के बावजूद तहसील में रिश्वतखोरी पर पूरी तरह लगाम नहीं लग पा रही है। बीते 10 महीनों में तहसील से जुड़े तीन कर्मचारियों की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तारी ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब आम जनता पूछ रही है कि आखिर लगातार हो रही इन घटनाओं की जिम्मेदारी कौन लेगा?
जानकारी के मुताबिक पहली कार्रवाई 27 जून 2025 को हुई थी, जब एंटी करप्शन टीम ने राजस्व निरीक्षक सुनील श्रीवास्तव को तहसील गेट के पास पैमाइश के नाम पर पांच हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। उस समय इस कार्रवाई को लेकर तहसील परिसर में काफी चर्चा रही और लोगों को उम्मीद थी कि इसके बाद व्यवस्था सुधरेगी।
लेकिन कुछ महीनों बाद ही दूसरा मामला सामने आ गया। 9 सितंबर 2025 को शुक्ल निवासी धनीराज प्रजापति ने आरोप लगाया कि नक्शा तरमीम के लिए राजस्व निरीक्षक भोलानाथ चौधरी द्वारा 50 हजार रुपये की मांग की गई। शिकायतकर्ता के मुताबिक कुछ धनराशि पहले दी जा चुकी थी, जबकि 20 हजार रुपये देने के लिए तहसील गेट के पास बुलाया गया था। शिकायत मिलने के बाद एंटी करप्शन टीम सक्रिय हुई और जैसे ही शिकायतकर्ता ने रुपये दिए, टीम ने राजस्व निरीक्षक को रिश्वत लेते हुए पकड़ लिया।
इसके बाद भी हालात नहीं बदले। गुरुवार को तीसरी बड़ी कार्रवाई में एंटी करप्शन टीम ने जन्म प्रमाण पत्र के मामले में लेखपाल अरविंद को तहसील के एक कक्ष से गिरफ्तार कर लिया। बताया जा रहा है कि जन्म प्रमाण पत्र बनाने के नाम पर रिश्वत लेने की शिकायत पर यह कार्रवाई की गई। मामले में जोगिया कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया जा रहा है।
अब जनता पूछ रही है — आखिर जिम्मेदार कौन?
लगातार तीन गिरफ्तारियों के बाद तहसील प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। क्षेत्र में चर्चा है कि अगर एक के बाद एक कर्मचारी रिश्वत लेते पकड़े जा रहे हैं तो कहीं न कहीं निगरानी और जवाबदेही की कमी जरूर है। लोगों का कहना है कि कार्रवाई तो हो रही है, लेकिन व्यवस्था सुधारने की दिशा में ठोस कदम नजर नहीं आ रहे।
मामला यहीं खत्म नहीं होता। जन्म प्रमाण पत्र से जुड़े कार्यों को लेकर आम लोगों की परेशानी और बढ़ गई है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि अभी तक किसी अन्य कर्मचारी को इस कार्य की जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से नहीं सौंपी गई है। इसके चलते जन्म प्रमाण पत्र बनवाने वाले लोग रोज तहसील के चक्कर काट रहे हैं। कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दे रहा कि अब यह काम कौन करेगा और कब तक व्यवस्था सामान्य होगी।
“गलती अधिकारी करें और जनता भुगते परेशानी”
स्थानीय लोगों का कहना है कि अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा आम जनता भुगत रही है। जरूरतमंद लोग जन्म प्रमाण पत्र जैसे जरूरी दस्तावेज के लिए भटक रहे हैं। कई लोगों का कहना है कि तहसील में काम कराने आने वालों को सिर्फ आश्वासन मिल रहा है, लेकिन समाधान नहीं।
अब लोगों के बीच कई सवाल चर्चा का विषय बने हुए हैं—
आखिर जिम्मेदारी किसे दी जाएगी?
अधिकारी हाथ पर हाथ धरे क्यों बैठे हैं?
क्या डर के कारण कोई जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं?
कब तक जनता ऐसे ही परेशान होकर भटकती रहेगी?
जनता चाहती है व्यवस्था में सुधार
क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि केवल गिरफ्तारी से समस्या खत्म नहीं होगी। जरूरत इस बात की है कि तहसील की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाई जाए, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय हो और जनता के जरूरी कार्य समय पर पूरे हों। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि जन्म प्रमाण पत्र समेत अन्य जरूरी कार्यों के लिए तत्काल नई व्यवस्था लागू की जाए ताकि आम नागरिकों को राहत मिल सके।