शहजाद आलम जिला संवाददाता
सिद्धार्थनगर।
जिले के डुमरियागंज तहसील क्षेत्र अंतर्गत कस्बा हल्लौर के सिविल लाइन्स स्थित इमामबारगाह हुसैनिया अबुतालिब में सोमवार को “याद-ए-शोहदा” कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में हक और सच्चाई की हिफाजत के लिए ईरान की ओर से लड़ी गई जंग में अमेरिका और इजराइल के हमलों में शहीद हुए लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। साथ ही अमेरिकी हमले में ईरान के एक स्कूल में मारे गए 168 छात्र-छात्राओं को भी याद किया गया। कार्यक्रम के दौरान पूरा माहौल गमगीन बना रहा। कॉन्फ्रेंस की शुरुआत कलाम-ए-पाक की तिलावत से हुई। इसके बाद मौलाना शहकार हुसैन जैदी, अरबाब फारूकी, मौलाना कल्बे रूशेद, मौलाना यासूब अब्बास, स्वामी सारंग महाराज, मौलाना हसन अकबर, मौलाना कारी सैय्यद फजलुर्रहमान, हादी अब्बास शाह, रियाज अहमद खान समेत अन्य वक्ताओं ने अपने संबोधन में शहीदों की कुर्बानियों और आयतुल्लाह अली खामनेई की जिंदगी व किरदार पर विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारत में ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि आयतुल्लाह डॉ. अब्दुल माजिद हकीम इलाही ने कहा कि ईरान ने पूरी दुनिया में इंसानियत, मानवता, सच्चाई और हक की हिफाजत के लिए लड़ाई लड़ी तथा अमेरिका और इजराइल के तानाशाही रवैये को चुनौती देने का काम किया। उन्होंने कहा कि आयतुल्लाह अली खामनेई की जिंदगी सादगी, सच्चाई और इंसाफ की मिसाल रही है। उन्होंने हजरत इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों के बताए रास्ते पर चलते हुए पूरी जिंदगी जुल्म और जालिम का विरोध किया तथा हमेशा मजलूम और निर्दोष लोगों का साथ दिया। अपने संबोधन के अंत में आयतुल्लाह डॉ. अब्दुल माजिद हकीम इलाही ने हजरत इमाम हुसैन की शहादत के मंजर को बयान किया, जिसे सुनकर कार्यक्रम में मौजूद लोग भावुक हो उठे और कई लोगों की आंखें नम हो गईं। इस दौरान नावेद रिजवी, नफीस हल्लौरी, हसन ताकीब, डॉ. वजाहत, तसकीन, बेताब, आलम हल्लौरी, कसीम रिजवी, खादिम अब्बास, कमाल असगर, जमाल हैदर, काजी अहमद फरीद अब्बासी, काजिम कर्बलाई, इंजीनियर इमरान लतीफ, मोहम्मद हैदर, इकबाल मेहदी, वरिष्ठ पत्रकार हाशिम रिजवी, राहिब, अली मेहदी, शराफत रिजवी, जावेद हयात समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।