अकरम पटेल की रिपोर्ट
बैतूल।
कभी सतपुड़ा की ठंडी हवाओं, घने जंगलों और प्राकृतिक शीतलता के लिए पहचाना जाने वाला बैतूल जिला अब भीषण गर्मी की आग में झुलस रहा है। तापमान लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है, और आम आदमी का जीवन कठिन होता जा रहा है। कांग्रेस जिला अध्यक्ष निलय डागा ने इन हालातों के लिए सीधे तौर पर भाजपा सरकार की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने विकास के नाम पर सिर्फ विनाश किया है। जमीन पर ऐसा कोई विकास दिखाई नहीं देता, जिससे जनता का जीवन बेहतर हुआ हो।
निलय डागा ने कहा कि बैतूल जिला एक समय मध्यप्रदेश के सबसे शांत, ठंडे और हरियाली से भरे क्षेत्रों में गिना जाता था। गर्मियों में भी यहां की जलवायु लोगों को राहत देती थी, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में हालात तेजी से बदले हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने बिना पर्यावरणीय संतुलन का ध्यान रखे विकास के नाम पर अंधाधुंध पेड़ों की कटाई कराई। बैतूल शहर के गांधी चौक का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि पार्किंग निर्माण के नाम पर वर्षों पुराने हरे-भरे पेड़ों को बेरहमी से काट दिया गया। ये पेड़ हमारे पूर्वजों की विरासत थे। शहर की पहचान और आने वाली पीढ़ियों की धरोहर थे।
– विकास नहीं, विनाश की राजनीति
कांग्रेस जिला अध्यक्ष ने कहा कि भाजपा जनता में विकास का भ्रम पैदा कर रही है, जबकि सच्चाई यह है कि प्रदेश की प्राकृतिक संपदा को लगातार खत्म किया जा रहा है। जंगलों को उद्योगपतियों के हवाले किया गया, लाखों पेड़ काटे गए और बदले में पौधारोपण सिर्फ सरकारी फाइलों और फोटो खिंचवाने तक सीमित रहा। उन्होंने कहा कि यदि विकास का मतलब जंगल खत्म करना, नदियों को सुखाना और शहरों को आग के गोले में बदल देना है, तो यह विकास नहीं बल्कि सुनियोजित विनाश है।
– एक पेड़ मां के नाम सिर्फ प्रचार का हथियार
डागा ने भाजपा सरकार के एक पेड़ मां के नाम अभियान पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जिस सरकार ने हजारों पेड़ों को कटवाया, वह अब संवेदनशीलता का दिखावा कर रही है। यदि सरकार वास्तव में प्रकृति के प्रति गंभीर होती तो आज प्रदेश के शहरों और गांवों में हरियाली नजर आती।
निलय डागा ने कहा कि सत्ता में बैठे लोग एसी कमरों में बैठकर विकास के दावे कर रहे हैं, जबकि गरीब और मजदूर वर्ग भीषण गर्मी में सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहा है।
कांग्रेस जिला अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि प्रदेश में बड़े उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए जंगलों का बड़े पैमाने पर विनाश किया गया। पेड़ों की कटाई को विकास का नाम दिया गया, लेकिन उसके दुष्परिणाम अब जनता भुगत रही है। उन्होंने कहा कि यदि किसी शहर की पहचान उसकी हरियाली से खत्म हो जाए और वहां गर्म हवाएं जीवन को असहनीय बना दें, तो इसे विकास नहीं कहा जा सकता। आज बैतूल सहित पूरे प्रदेश में तापमान बढ़ रहा है, जलस्रोत प्रभावित हो रहे हैं और पर्यावरणीय असंतुलन तेजी से बढ़ रहा है।
– प्रकृति से खिलवाड़ का खतरनाक परिणाम
पर्यावरण विशेषज्ञों का हवाला देते हुए डागा ने कहा कि प्रकृति के साथ छेड़छाड़ का असर अब सीधे लोगों के जीवन पर दिखाई देने लगा है। जंगल कम होंगे तो तापमान बढ़ेगा, बारिश का संतुलन बिगड़ेगा और जल संकट गहराएगा। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने अल्पकालिक राजनीतिक और आर्थिक फायदे के लिए पर्यावरणीय संतुलन को नजरअंदाज किया। यही वजह है कि आज प्रदेश के कई हिस्सों में गर्मी लगातार भयावह होती जा रही है।
निलय डागा ने कहा कि यदि अब भी जनता नहीं जागी तो आने वाला समय और ज्यादा खतरनाक हो सकता है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर ऐसी कौन सी मजबूरी थी कि वर्षों पुराने पेड़ों को काट दिया गया, लेकिन उतनी गंभीरता से नए पेड़ लगाने और उन्हें बचाने का प्रयास नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार को यह समझना होगा कि प्रकृति को नुकसान पहुंचाकर कोई भी समाज सुरक्षित और समृद्ध नहीं बन सकता।