एफसीआई गोदामों में जगह की कमी से पंजाब के शैलर उद्योग पर संकट, मिलिंग ठप होने का खतरा
अमलोह, 27 मई (अजय कुमार)
पंजाब में एफसीआई के गोदाम भरे होने के कारण शैलर उद्योग गंभीर संकट का सामना कर रहा है। यह बात अमलोह शैलर एसोसिएशन के प्रधान राकेश कुमार गर्ग ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कही।उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो आने वाले 2026-27 धान सीजन में पंजाब की मंडियों और शैलर उद्योग की स्थिति बेहद गंभीर हो सकती है।
राकेश कुमार गर्ग ने बताया कि 2025-26 सीजन के लिए मिलिंग किया गया चावल अभी तक एफसीआई के गोदामों में स्टोर नहीं हो पाया है। पंजाब में अब तक केवल करीब 65 प्रतिशत चावल ही एफसीआई को डिलीवर हो सका है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार की ओर से वर्ष 2023-24 के पुराने चावल को जल्द हटाने के सख्त निर्देश दिए गए हैं, लेकिन मौजूदा हालात बेहद चिंताजनक हैं।उन्होंने बताया कि रिपोर्ट के अनुसार पंजाब में वर्ष 2023-24 का करीब 22 लाख 31 हजार टन चावल अभी भी गोदामों में पड़ा हुआ है, जबकि 2024-25 सीजन का लगभग 71 लाख 16 हजार टन चावल भी स्टोर है। इसके अलावा 2025-26 सीजन के लिए लगभग 75 लाख टन चावल रखने की आवश्यकता पड़ेगी, जिसके लिए करीब 700 रेलवे रैक की जरूरत होगी। शैलर मालिक इस समय भारी आर्थिक दबाव में हैं। लेबर रेट लगभग तीन गुना तक बढ़ चुका है, जबकि चावल में नमी की मात्रा घटकर 11 प्रतिशत तक पहुंच गई है। भीषण गर्मी के कारण चावल को नुकसान हो रहा है, जिसकी भरपाई के लिए सरकार को प्रत्येक शैलर पर लगभग 20 लाख रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। जिन शैलरों के पास अधिक स्टॉक है, उनका खर्च और ज्यादा बढ़ रहा है।राकेश कुमार गर्ग ने कहा कि आने वाले सीजन के लिए सरकार ने वेयरहाउस में जगह बढ़ाने की दिशा में कोई ठोस प्रबंध नहीं किए हैं। दूसरी ओर किसानों द्वारा बड़ी मात्रा में हाइब्रिड धान लगाया जा रहा है, जिससे नई परेशानियां खड़ी हो रही हैं। उन्होंने बताया कि हाइब्रिड धान से केवल 60 किलो चावल तैयार होता है और उसमें टूटे चावल (ब्रोकन राइस) की मात्रा 35 से 40 प्रतिशत तक रहती है।उन्होंने पंजाब सरकार और केंद्र सरकार से मांग की कि हाइब्रिड धान से तैयार होने वाले चावल के स्पेसिफिकेशन में तुरंत बदलाव किया जाए। साथ ही मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान और प्रधानमंत्री Narendra Modi से अपील की कि पंजाब के शैलरों में पड़ा 2025-26 का चावल तुरंत उठाया जाए तथा पुराने स्टॉक को निर्यात (एक्सपोर्ट) के जरिए जल्द निपटाया जाए।उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि समय रहते समाधान नहीं निकला तो 2026-27 धान सीजन में शैलर मालिक धान की मिलिंग नहीं कर पाएंगे, क्योंकि एफसीआई गोदामों में चावल रखने के लिए जगह ही उपलब्ध नहीं होगी। इससे शैलर बंद होने की नौबत आ सकती है और इसका सीधा असर पंजाब के किसानों की आर्थिक स्थिति पर पड़ेगा उन्होंने कहा कि मंडियों से धान की उठान प्रभावित होने पर पंजाब में हालात गंभीर हो सकते हैं और कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने का भी खतरा पैदा हो सकता है। उन्होंने किसान यूनियनों से भी अपील की कि वे इस मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से तुरंत संपर्क करें ताकि पुराने चावल का जल्द निपटारा हो सके और आने वाली फसल की खरीद प्रक्रिया प्रभावित न हो।
फोटो कैप्शन :जानकारी देते हुए राकेश गर्ग