जनवादी महिला समिति और सीटू ने मांग की है कि हरियाणा राज्य महिला आयोग की अध्यक्षा रेनू भाटिया को उनके पद से तुरंत हटाया जाए।
जनवादी महिला समिति की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जगमति सांगवान, राज्य अध्यक्ष सविता, महासचिव उषा सरोहा तथा सीटू के राज्य महासचिव जयभगवान और कुरुक्षेत्र जिला संयोजक रानी ने संयुक्त प्रेस बयान जारी करते हुए कहा कि कुरुक्षेत्र के नागरिक अस्पताल में एक नाबालिग के साथ हुए यौन उत्पीड़न के मामले में 7 जून को हरियाणा राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रेनू भाटिया द्वारा अस्पताल के नर्सिंग स्टाफ को सीधे तौर पर दोषी ठहराना, अपराधी डॉक्टर से मिलीभगत के आरोप लगाना तथा एक नर्स की बेटी का उदाहरण देकर व्यक्तिगत टिप्पणी करना बेहद आपत्तिजनक, गैर-जिम्मेदाराना और असहनीय है।
नेताओं ने कहा कि स्टाफ नर्सों पर इस जघन्य अपराध का ठीकरा फोड़ना साफ तौर पर उन लोगों को बचाने का प्रयास प्रतीत होता है, जिन्होंने आरोपों से घिरे डॉक्टर को दोबारा नियुक्ति दी। मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करने के बजाय महिला आयोग की अध्यक्ष द्वारा महिला कर्मचारियों को निशाना बनाना उनके पद की गरिमा और जिम्मेदारी के विपरीत है।
उन्होंने कहा कि रेनू भाटिया इससे पहले भी कई बार महिला विरोधी बयान दे चुकी हैं। यौन उत्पीड़न के आरोपी पूर्व मंत्री संदीप सिंह को क्लीन चिट देना, महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ होने वाले अपराधों के लिए उन्हीं को जिम्मेदार ठहराना तथा विभिन्न मामलों में धार्मिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा देने वाले हस्तक्षेप करना उनके पूर्व आचरण के उदाहरण हैं। इस बार भी उन्होंने वास्तविक दोषियों को बचाने और पहले से ही भारी कार्यभार एवं दबाव में काम कर रही महिला कर्मचारियों को प्रताड़ित करने का प्रयास किया है।
संगठनों के नेताओं ने कहा कि हरियाणा में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध लगातार बढ़ रहे हैं तथा लिंगानुपात में गिरावट भी गंभीर चिंता का विषय है। इसका एक बड़ा कारण यह है कि महिला अधिकारों के प्रति संवेदनहीन सोच रखने वाले लोग संवैधानिक और वैधानिक संस्थाओं के महत्वपूर्ण पदों पर बैठे हुए हैं।
उन्होंने कहा कि महिला आयोग जैसी संस्थाओं का गठन महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव, उत्पीड़न और असमानता को दूर करने तथा उनकी स्थिति को बेहतर बनाने के उद्देश्य से किया गया था। ये संस्थाएं महिला आंदोलनों और प्रगतिशील संगठनों के लंबे संघर्षों का परिणाम हैं। लेकिन रेनू भाटिया के बयान और कार्यप्रणाली से स्पष्ट है कि उन्हें अपने पद के उद्देश्य, दायित्व और संवेदनशीलता का समुचित बोध नहीं है। कई अवसरों पर वे महिला आयोग की अध्यक्ष के बजाय भाजपा सरकार की प्रवक्ता और आरएसएस की प्रचारक की भूमिका निभाती दिखाई देती हैं। ऐसी स्थिति में न्याय की उम्मीद लेकर महिला आयोग के पास पहुंचने वाली महिलाओं को निष्पक्ष सहायता और न्याय मिल पाना संभव नहीं है।
जनवादी महिला समिति और सीटू मांग करते हैं कि रेनू भाटिया को तत्काल महिला आयोग की अध्यक्ष पद से हटाया जाए तथा उनकी जगह ऐसी महिला को नियुक्त किया जाए जो आयोग के मूल उद्देश्यों के अनुरूप महिलाओं के अधिकारों और न्याय के लिए कार्य कर सके।
संगठन यह भी मांग करते हैं कि कुरुक्षेत्र के दागी डॉक्टर को दोबारा नियुक्त करने वाले अधिकारियों और जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए तथा सरकारी अस्पतालों में महिला डॉक्टरों, स्टाफ नर्सों और महिला अटेंडेंटों की नियमित एवं पर्याप्त नियुक्तियां की जाएं।
पुष्पा रानी रिपोर्टर कैंथल