भोगांव (मैनपुरी)।
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा लागू की जा रही नई ई-पंजीकरण व्यवस्था के विरोध में शुक्रवार को तहसील अभिभाषक परिषद, बैनामा लेखक संघ और स्टाम्प विक्रेता संगठन ने सामूहिक कार्य बहिष्कार किया। इस ऐतिहासिक हड़ताल के कारण वर्षों बाद तहसील में पूरे दिन कामकाज पूरी तरह ठप रहा। न तो कोई बैनामा पंजीकृत हो सका और न ही कोई न्यायिक कार्य हुआ। यहाँ तक कि वकीलों और बैनामा लेखकों और स्टाम्प विक्रेताओं ने अपने बस्ते भी नहीं लगाए, जिससे दूर-दराज से आए फरियादियों को खाली हाथ लौटना पड़ा।
उपनिबंधक कार्यालय पर प्रदर्शन, लगाए नारे
तीनों संगठनों के अध्यक्षों के नेतृत्व में आक्रोशित अधिवक्ताओं और लेखकों ने पूरे दिन उपनिबंधक कार्यालय के सामने धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने ‘तहसील परिवार एकता जिंदाबाद’ और ‘काला कानून वापस लो’ के गगनभेदी नारे लगाए। इसके बाद, उपजिलाधिकारी नीरज द्विवेदी को मुख्यमंत्री और महानिरीक्षक निबंधन लखनऊ के नाम संबोधित एक ज्ञापन सौंपा गया।
ज्ञापन में कहा गया है कि ई पंजीकरण व्यवस्था लागू होने से लाखों परिवारों के सामने भुखमरी का संकट पैदा हो सकता है।खा गया है कि
”इस नई व्यवस्था के लागू होने से केवल भोगांव तहसील ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश के लाखों अधिवक्ता, बैनामा लेखक, स्टाम्प विक्रेता और उनके मुंशी पूरी तरह बेरोजगार हो जाएंगे। सरकार के इस कदम से उनके परिवारों के सामने रोजी-रोटी और खाने-पीने का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।”
प्रदर्शनकारियों ने जनहित और रोजगार की रक्षा के लिए इस नियम को तत्काल प्रभाव से वापस लेने की मांग की है।
सभा में ये रहे मौजूद
कार्य बहिष्कार के दौरान आयोजित विरोध सभा की अध्यक्षता बैनामा लेखक संघ के वासुदेव पाण्डेय ने की। इस मौके पर मुख्य रूप से:
राजेश कुमार यादव अध्यक्ष, अभिभाषक परिषद
विनय कुमार पाण्डेय अध्यक्ष, बैनामा लेखक संघ
संतोष मिश्रा अध्यक्ष, स्टाम्प विक्रेता संघ
हेमन्त मिश्रा (महासचिव)
के अलावा रमेश चन्द्र तिवारी, सुबोध सक्सेना, अखिलेश गौतम, हरिओम यादव, जयसिंह शाक्य, सुधांशु मिश्रा, केके पाण्डेय, अमन यादव, राजेश पांडेय, काजी शाहरुख अब्बासी, धनवेश पाल, चन्द्र प्रकाश शाक्य, शैलेन्द्र शास्त्री, सुमित श्रीवास्तव, श्याम सिंह, वेदांत मिश्रा, और कुलदीप दुबे सहित भारी संख्या में अधिवक्ता व लेखक मौजूद रहे।
संवाददाता राहुल यादव