किशोर कुमार छत्तीसगढ़ स्टेट रिपोर्टर इंडियन टीवी न्यूज नेशनल
छत्तीसगढ़ में भीषण गर्मी और लू के प्रकोप के बीच राज्य सरकार के निर्देशानुसार 16 जून, मंगलवार से स्कूल खुलने जा रहे हैं।
हालांकि कई जिलों में दिन का तापमान अब भी 42 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है। ऐसे में अभिभावकों, शिक्षाविदों और निजी स्कूल संगठनों ने सरकार के फैसले पर चिंता जताते हुए पुनर्विचार की मांग की है।
सबसे बड़ी चिंता स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर है। प्रदेश के कई सरकारी स्कूलों में अब तक बिजली कनेक्शन उपलब्ध नहीं है,
जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार बिजली कटौती की समस्या बनी हुई है। अनेक स्कूलों में पंखों की भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं है और कूलर या एयर कंडीशनर जैसी सुविधाएं मौजूद नहीं हैं।
अभिभावकों का कहना है कि जब घरों में कूलर और एसी भी तेज गर्मी के सामने बेअसर साबित हो रहे हैं, तब छोटे बच्चों को गर्म और बंद कमरों में बैठाकर पढ़ाई कराना उनकी सेहत के लिए जोखिम भरा हो सकता है।
शिक्षाविदों ने भी सरकार से अपील की है कि स्कूल खोलने से पहले बिजली, पंखे और स्वच्छ पेयजल जैसी आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं।
उनका कहना है कि वर्तमान मौसम में जल्दबाजी में स्कूल खोलना बच्चों के स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकता है।
प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने भी कहा कि सरकार को मौसम की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए पहले सभी स्कूलों में आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी करनी चाहिए, उसके बाद ही नियमित कक्षाएं शुरू करना उचित होगा।
स्वास्थ्य विभाग की लू नियंत्रण एडवाइजरी में छोटे बच्चों को लू का सबसे अधिक संवेदनशील वर्ग बताया गया है। डॉक्टरों के अनुसार अभी भी अस्पतालों में लू से प्रभावित मरीज पहुंच रहे हैं। ऐसे में बच्चों का तेज धूप में सफर करना और पर्याप्त सुविधाओं के बिना स्कूलों में बैठना सुरक्षित नहीं माना जा सकता।
स्कूल खुलने के निर्णय को लेकर अभिभावकों के बीच कई सवाल उठ रहे हैं। उनका कहना है कि यदि किसी बच्चे की तबीयत बिगड़ती है तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा।
पालकों ने सरकार से स्कूल खोलने की तारीख पर पुनर्विचार करने और पहले सभी स्कूलों में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।
फिलहाल 16 जून से स्कूल खुलने की तैयारी पूरी है, लेकिन भीषण गर्मी को देखते हुए अभिभावकों और शिक्षाविदों की चिंता लगातार बनी हुई है।