आँवला (बरेली)
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सूबे के सभी उपनिबंधक (रजिस्ट्री) कार्यालयों को ऑनलाइन ‘ई-निबंधक व्यवस्था’ से जोड़े जाने के फरमान के खिलाफ स्थानीय वकीलों ने पूरी तरह मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को आँवला बार एसोसिएशन की एक आपातकालीन बैठक एसोसिएशन के अध्यक्ष अनेकपाल सिंह यादव की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक में सरकार के इस नए अध्यादेश को तानाशाही पूर्ण बताते हुए वकीलों, स्टाम्प वेंडरों और कंप्यूटर ऑपरेटरों की आजीविका पर कुठाराघात करार दिया गया। इसके विरोध में बार एसोसिएशन ने उपनिबंधक कार्यालय के समस्त न्यायिक एवं प्रशासनिक कार्यों के पूर्ण बहिष्कार (हड़ताल) का ऐलान कर दिया।
इसके पश्चात, बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने एकजुट होकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित एक त्राहिमाम ज्ञापन उपजिलाधिकारी (एसडीएम) आँवला को सौंपा। ज्ञापन में महानिदेशक निबंधक उत्तर प्रदेश लखनऊ के पत्रांक संख्या 2523 दिनांक 04/06/2026 के आदेश को तत्काल वापस लेने की मांग की गई है।
लाखों परिवारों के सामने रोटी-रोटी का संकट:
बार एसोसिएशन के महासचिव अवनीश तिवारी (एडवोकेट) ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि पहले से ही प्रदेश में बेरोजगारी चरम पर है। ऐसे में रजिस्ट्री दफ्तरों को पूर्णतः ऑनलाइन कर ‘ई-निबंधक व्यवस्था’ लागू करने से प्रदेश के लाखों अधिवक्ताओं, बैनामा लेखकों, स्टाम्प वेंडरों, फोटोस्टेट व कंप्यूटर ऑपरेटरों के सामने सीधे तौर पर भुखमरी की स्थिति पैदा हो जाएगी। अधिवक्ताओं का आरोप है कि इस नए कानून को आम जनता और इस व्यवसाय से जुड़े लोगों पर जबरन थोपा जा रहा है। सरकार युवाओं को रोजगार देने के बजाय, स्वरोजगार के माध्यम से अपने परिवारों का पेट पाल रहे लोगों से उनका काम छीन रही है।
मुंसिफ कोर्ट चालू, रजिस्ट्री दफ्तर में काम पूरी तरह ठप:
महासचिव अवनीश तिवारी ने बताया कि आंदोलन के प्रथम चरण में सोमवार को बार एसोसिएशन के आह्वान पर सभी अधिवक्ताओं ने उपनिबंधक कार्यालय (रजिस्ट्री दफ्तर) में बैनामा व अन्य सभी प्रशासनिक कार्यों को पूरी तरह ठप रखा। हालांकि, वादकारियों की सहूलियत और न्यायिक कार्यों को देखते हुए मुंसिफ न्यायालय को इस बहिष्कार से मुक्त रखा गया है, वहाँ सामान्य रूप से कार्य संचालित होता रहा।
एसोसिएशन ने इस संबंध में उपजिलाधिकारी (न्यायिक/प्रशासनिक), तहसीलदार और उपनिबंधक आँवला को भी लिखित रूप से सूचित कर दिया है। बार एसोसिएशन ने साफ चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने इस जनविरोधी और व्यवसाय विरोधी काले कानून को तत्काल वापस नहीं लिया, तो तहसील स्तर पर शुरू हुआ यह आंदोलन पूरे प्रदेश में उग्र रूप धारण करेगा। इस दौरान कार्यकारिणी के तमाम वरिष्ठ अधिवक्ता, पदाधिकारी और भारी संख्या में बैनामा लेखक व स्टाम्प वेंडर मौजूद रहे।
प्रवीन कुमार सक्सेना तहसील रिपोर्टर आंवला बरेली