किशोर कुमार छत्तीसगढ़ स्टेट रिपोर्टर इंडियन टीवी न्यूज नेशनल
बिलासपुर।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि दुष्कर्म पीड़िता द्वारा आत्महत्या करने की स्थिति में सुसाइड नोट का न होना आरोपी को राहत देने का आधार नहीं बन सकता।
अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में उपलब्ध साक्ष्यों और परिस्थितियों का समग्र मूल्यांकन किया जाना चाहिए।
यह फैसला कसडोल क्षेत्र से जुड़े एक मामले में आया, जिसमें आरोपी पर दुष्कर्म करने और पीड़िता को आत्महत्या के लिए मजबूर करने का आरोप था।
मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के निर्णय को सही ठहराते हुए आरोपी को सुनाई गई 10 वर्ष की सजा को बरकरार रखा।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि आत्महत्या के लिए उकसाने या दुष्कर्म से जुड़े मामलों में केवल सुसाइड नोट की अनुपस्थिति के आधार पर आरोपी को संदेह का लाभ नहीं दिया जा सकता।
यदि परिस्थितिजन्य साक्ष्य, गवाहों के बयान और अन्य प्रमाण आरोपी की भूमिका को स्थापित करते हैं, तो न्यायालय उसी आधार पर निर्णय लेने के लिए सक्षम है।
हाईकोर्ट का यह फैसला महिलाओं के खिलाफ अपराधों से जुड़े मामलों में न्यायिक दृष्टिकोण को स्पष्ट करता है और यह संदेश देता है कि सुसाइड नोट का अभाव न्याय की राह में बाधा नहीं बन सकता।