बारीपदा, 28 अगस्त: ओडिशा के मयूरभंज जिले में जंगल और पर्यावरण संरक्षण को समर्पित अनोखा ‘जंगल रक्षा बंधन’ उत्सव इस वर्ष अपने 23वें वर्ष में प्रवेश कर गया। पर्यावरणविद् विवेकानंद पटनायक की परिकल्पना से वर्ष 2004 में शुरू हुआ यह अभियान अब देश के कई राज्यों में जंगल संरक्षण और पर्यावरण जागरूकता का संदेश दे रहा है।
इस वर्ष कार्यक्रम का आयोजन शूलियापदा ब्लॉक के देउली आरक्षित जंगल में किया गया, जिसमें आसपास के 20 से अधिक गांवों से 700 से ज्यादा जंगल सुरक्षा प्रतिनिधि, ग्रामीण, पंचायती राज प्रतिनिधि, वन विभाग के कर्मचारी, स्वयंसेवी संस्थाओं के सदस्य, शिक्षक-छात्र और महिला स्वयं सहायता समूहों के सदस्य शामिल हुए।
6,000 एकड़ जंगल की सुरक्षा का संकल्प
कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों और वन विभाग ने मिलकर करीब 6,000 एकड़ में फैले देउली आरक्षित जंगल की पूरी सुरक्षा करने का संकल्प लिया। इस दौरान जंगल सुरक्षा समितियों से जुड़े सदस्यों को उनके योगदान के लिए सम्मानित भी किया गया।
सभा की अध्यक्षता बारीपदा वन मंडल अधिकारी गोविंद चंद्र बिश्वाल ने की। महाराजा श्रीराम चंद्र भंजदेव विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर महेंद्र कुमार महांती कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रहे, जबकि सिमिलिपाल टाइगर रिजर्व दक्षिण के उप निदेशक सुमित कुमार कर ने मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित किया।
कार्यक्रम में मयूरभंज के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक दीपक कुमार गोछायत समेत कई अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे। ग्रामीण प्रतिनिधियों ने भी जंगल और पर्यावरण संरक्षण को लेकर अपने विचार साझा किए।
जंगल को राखी बांधकर दिया संरक्षण का संदेश
‘जंगल रक्षा बंधन’ का उद्देश्य लोगों को जंगलों के प्रति अपनी जिम्मेदारी का एहसास कराना और स्थानीय समुदायों को वन संरक्षण से जोड़ना है। इस पहल के जरिए जंगल को केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि समाज की साझा विरासत मानकर उसकी रक्षा करने का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम का आयोजन धरमपुरा ग्राम जंगल सुरक्षा समिति, स्पार्डा स्वयंसेवी संस्था और बारीपदा वन मंडल के संयुक्त प्रयास से किया गया। पर्यावरणविद् विवेकानंद पटनायक के संयोजन में हुए इस आयोजन ने एक बार फिर जंगल और इंसान के बीच मजबूत रिश्ते का संदेश दिया।