बारीपदा, 3/9:दहेज प्रथा के उन्मूलन, दहेज निषेध अधिनियम, 1961 के प्रभावी क्रियान्वयन और इस संबंध में कानूनी जागरूकता पैदा करने के उद्देश्य से बारीपदा में जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।जिलाधिकारी कार्यालय स्थित सम्मेलन कक्ष में अतिरिक्त जिलाधिकारी श्री दुःखबंधु नायक की अध्यक्षता में यह प्रशिक्षण आयोजित हुआ। कार्यक्रम में दहेज प्रथा के उन्मूलन और कानून के प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तृत चर्चा की गई।विषय विशेषज्ञ श्री विभु प्रसाद दास ने पावरपॉइंट प्रस्तुति के माध्यम से दहेज निषेध अधिनियम, 1961 के विभिन्न कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने दहेज की परिभाषा, दहेज देने, लेने या मांगने से संबंधित कानूनी प्रावधानों, अपराध और दंड व्यवस्था पर प्रकाश डाला।इसके साथ ही दहेज उत्पीड़न और हिंसा की घटनाओं में शिकायत दर्ज कराने तथा रिपोर्ट करने के महत्व के बारे में प्रतिभागियों को जागरूक किया गया।कार्यक्रम में दहेज प्रथा के सामाजिक, आर्थिक और मानसिक दुष्प्रभावों पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि दहेज प्रथा महिलाओं के सम्मान, समानता और अधिकारों को प्रभावित करती है। इसके उन्मूलन के लिए केवल कानून का कड़ाई से क्रियान्वयन ही नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता, समन्वित प्रयास और सामूहिक भागीदारी भी आवश्यक है।प्रशिक्षण कार्यक्रम में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री गौतम किसान, उपजिलाधिकारी श्रीमती कस्तूरी पंडा, जिला समाज कल्याण अधिकारी श्रीमती संयुक्ता महाराणा और जिला सुरक्षा अधिकारी श्रीमती सस्मिता महांती उपस्थित रहीं। उन्होंने दहेज प्रथा के उन्मूलन, महिलाओं की सुरक्षा और कानून के क्रियान्वयन के संबंध में अपने विचार रखे।कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के अधिकारियों के अलावा वन स्टॉप सेंटर, शक्ति सदन और एफसीसी से जुड़े कर्मचारी, राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी तथा विभिन्न महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने भाग लेकर प्रशिक्षण में सक्रिय सहभागिता निभाई।
मयूरभंज से हिमांशु शेखर प्रहराज, राज्य संवाददाता।