वाराणसी। बीएचयू अस्पताल के आईसीयू में लंबे समय से भर्ती पद्मश्री प्रो. डॉ. टीके लहरी से कथित दुर्व्यवहार और मारपीट का मामला सामने आया है। परिजनों ने आरोप लगाया है कि कार्डियोथोरेसिक विभाग के एक एसोसिएट प्रोफेसर ने आईसीयू में प्रो. लहरी के साथ गाली-गलौज की और उन्हें थप्पड़ मारा। परिजनों के अनुसार घटना में उनके चेहरे और आंख के आसपास चोट आई है।
मामले की जानकारी मिलने के बाद परिजनों ने बीएचयू के कुलपति, आईएमएस निदेशक और चिकित्सा अधीक्षक को ई-मेल भेजकर शिकायत की। उन्होंने घटना की निष्पक्ष जांच के साथ प्रो. लहरी का चिकित्सकीय परीक्षण कराने की मांग की है। शिकायत के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले की जांच के लिए मेडिकल बोर्ड गठित किया है। बोर्ड के सदस्यों ने आईसीयू पहुंचकर प्रो. लहरी की स्वास्थ्य स्थिति का जायजा लिया।
आरोपों को निदेशक ने बताया गलत
आईएमएस बीएचयू के निदेशक डॉ. एसएन संखवार ने बताया कि परिजनों की ओर से ई-मेल मिलने के बाद अधिकारी मौके पर पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि जिस चिकित्सक पर आरोप लगाया गया है, वही डॉक्टर प्रो. लहरी की देखभाल कर रहे हैं और वह उनके शिष्य भी रहे हैं। निदेशक के मुताबिक परिजनों को प्रो. लहरी की स्थिति और संबंधित रिपोर्ट की जानकारी दी गई है।
उन्होंने बताया कि परिजनों से अस्पताल आकर प्रो. लहरी को देखने के लिए भी कहा गया था, लेकिन दो सितंबर के बाद से अब तक वे अस्पताल नहीं आए हैं। स्वास्थ्य स्थिति पर नजर रखने के लिए मेडिकल बोर्ड का गठन किया गया है। निदेशक ने लगाए गए आरोपों को गलत बताया है।
85 वर्षीय प्रो. टीके लहरी 27 जनवरी 2026 से बीएचयू अस्पताल के आईसीयू में भर्ती हैं। परिजनों के मुताबिक उन्हें कथित घटना की जानकारी एक सितंबर को कार्डियोथोरेसिक विभाग की ओर से मिली। इसके बाद उन्हें प्रो. लहरी के चेहरे पर चोट के फोटो भी भेजे गए।
फोटो देखने के बाद परिजनों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से संपर्क किया और पूरे मामले की जांच की मांग की। उनका कहना है कि प्रो. लहरी की विस्तृत चिकित्सकीय जांच होनी चाहिए, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि चोट केवल बाहरी है या अंदरूनी चोट की भी कोई स्थिति है।
परिजनों ने जानकारी समय पर नहीं मिलने का लगाया आरोप
प्रो. लहरी के परिवार के सदस्य कोलकाता में रहते हैं। परिजनों का दावा है कि उन्हें घटना की जानकारी बीएचयू प्रशासन से नहीं बल्कि विभाग के एक डॉक्टर के माध्यम से मिली। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रो. लहरी की बीमारी की जानकारी भी उन्हें समय पर नहीं दी गई।
परिजनों के मुताबिक अस्पताल में भर्ती होने से पहले प्रो. लहरी करीब 15 दिनों तक घर पर ही बिस्तर पर थे। बाद में उनकी तबीयत से जुड़ी स्थिति सामने आने के बाद उन्हें बीएचयू अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उनका उपचार शुरू हुआ।
चिकित्सा क्षेत्र में योगदान के लिए मिला पद्मश्री
चिकित्सा सेवा और मरीजों के प्रति योगदान के लिए प्रो. टीके लहरी को वर्ष 2006 में पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया था। परिजनों के मुताबिक वह अपनी पेंशन का बड़ा हिस्सा विभिन्न संस्थानों को दान करते रहे हैं। परिवार का कहना है कि प्रो. लहरी आर्थिक मदद लेने से बचते रहे हैं और सादगीपूर्ण जीवन जीते हुए मरीजों की सेवा को प्राथमिकता देते रहे।