अतिवृष्टि से प्रभावित फसलों का लेखपाल एवं कृषि विभाग द्वारा किया जा रहा सर्वे
जनपद के करीब 578 गांव अतिवृष्टि से प्रभावित, टोल फ्री नंबर पर 24 हजार से अधिक शिकायतें दर्ज
डिजिटल क्रॉप सर्वे को फसल क्षति का सर्वे न समझें किसान
झांसी। अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व श्रीमती पल्लवी मिश्रा ने बताया कि विगत दिनों हुई अतिवृष्टि से जनपद की विभिन्न तहसीलों में प्रभावित फसलों का सर्वे कार्य लगातार जारी है। तहसील स्तर पर लेखपालों एवं कृषि विभाग की टीमों द्वारा प्लॉट-टू-प्लॉट सर्वे कर फसल क्षति का आकलन किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि जनपद के लगभग 578 गांव अतिवृष्टि से प्रभावित हुए हैं। वहीं, फसल बीमा कराने वाले किसानों तथा कृषि विभाग द्वारा जारी टोल फ्री नंबर 14447 पर दर्ज शिकायतों के आधार पर भी सर्वे कार्य कराया जा रहा है। इसके लिए तहसीलवार लेखपाल, पंचायत सहायक एवं बीमा कंपनी के कर्मचारियों की संयुक्त टीमें गठित की गई हैं।
अपर जिलाधिकारी ने बताया कि टोल फ्री नंबर पर अब तक जनपद में 24 हजार से अधिक शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं। इन शिकायतों के आधार पर संबंधित टीमों द्वारा फसल क्षति का आकलन किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि जनपद में 10 अगस्त से खरीफ पड़ताल/डिजिटल क्रॉप सर्वे का कार्य भी चल रहा है। शासन के निर्देशों के क्रम में इस सर्वे में लेखपालों के साथ पंचायत सहायक, ग्राम्य विकास विभाग के ग्राम रोजगार सेवक, कृषि विभाग के बीटीएम (ब्लॉक टेक्निकल मैनेजर), एटीएम (असिस्टेंट टेक्निकल मैनेजर) तथा फसलों की पहचान एवं एंड्रॉयड मोबाइल के उपयोग में दक्ष युवाओं की भी सेवाएं ली जा रही हैं।
अपर जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि डिजिटल क्रॉप सर्वे और फसल क्षति सर्वे अलग-अलग कार्य हैं। डिजिटल क्रॉप सर्वे के लिए उपरोक्त व्यक्तियों द्वारा किए जा रहे सर्वे को किसान फसल क्षति का सर्वे न समझें और किसी प्रकार के भ्रम में न रहें।
उन्होंने बताया कि अतिवृष्टि से हुई फसल क्षति का सर्वे लेखपाल एवं कृषि विभाग के संबंधित कर्मचारियों द्वारा किया जा रहा है, जिसकी प्रक्रिया वर्तमान में जारी है। उन्होंने किसानों से अपील की कि दोनों सर्वे कार्यों के अंतर को समझें और किसी भी तरह की भ्रांति होने पर संबंधित अधिकारियों से जानकारी प्राप्त करें।
