बारिपदा, 21/9: मयूरभंज के गौरवशाली इतिहास के अनूठे स्मारक के रूप में पहचाने जाने वाला बारिपदा स्थित ऐतिहासिक राजमहल संरक्षण के अभाव में धीरे-धीरे जर्जर होता जा रहा है। कभी भंज राजवंश की राजकीय गतिविधियों का केंद्र रहा यह ऐतिहासिक भवन वर्तमान में शिक्षण संस्थान के रूप में उपयोग किया जा रहा है। पहले यहां एमपीसी कॉलेज संचालित होता था, जबकि वर्तमान में एमपीसी जूनियर कॉलेज की गतिविधियां चल रही हैं।लंबे समय से आवश्यक रखरखाव और संरक्षण के अभाव में राजमहल के विभिन्न हिस्सों की स्थिति खराब हो गई है। कुछ कमरों की हालत खतरनाक होने के कारण वहां विद्यार्थियों की पढ़ाई और अन्य गतिविधियों के संचालन को लेकर सुरक्षा संबंधी सवाल उठ रहे हैं।इसी परिप्रेक्ष्य में आज ओडिशा सरकार के आवास एवं शहरी विकास मंत्री डॉ. कृष्णचंद्र महापात्र ने एमपीसी जूनियर कॉलेज का दौरा किया। मंत्री ने राजमहल के विभिन्न हिस्सों का निरीक्षण करने के साथ ही जर्जर एवं जोखिमपूर्ण कमरों की स्थिति का स्वयं जायजा लिया।विद्यार्थियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए मंत्री ने खतरनाक कमरों में कक्षाएं संचालित नहीं करने तथा जल्द से जल्द आवश्यक स्थानांतरण की व्यवस्था करने के लिए प्रशासन को निर्देश दिया। उन्होंने ऐतिहासिक राजमहल को केवल एक पुराने भवन के रूप में नहीं, बल्कि इसके ऐतिहासिक महत्व को ध्यान में रखते हुए संरक्षित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।मयूरभंज के हरिपुर स्थित राजमहल के अवशेष में तब्दील होने का उदाहरण भी इस संदर्भ में महत्वपूर्ण है। ऐसे में बारिपदा के इस ऐतिहासिक राजमहल का समय रहते संरक्षण नहीं किया गया तो भविष्य में इसके ऐतिहासिक स्वरूप के नष्ट होने की आशंका बनी हुई है।इसके बाद मंत्री महापात्र ने तखतपुर स्थित एमपीसी स्वायत्त महाविद्यालय और आईटीआई का भी दौरा किया। बताया गया कि एमपीसी स्वायत्त महाविद्यालय में अस्थायी रूप से पांच कमरे तथा आईटीआई में तीन कमरों की व्यवस्था की गई है। इससे ऐतिहासिक राजमहल के जोखिमपूर्ण हिस्सों से विद्यार्थियों को सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित कर पढ़ाई जारी रखने में मदद मिलेगी।इसके साथ ही नए महाविद्यालय भवन के निर्माण के लिए भूमि की पहचान को लेकर मंत्री ने तहसीलदार के साथ चर्चा की। भविष्य में विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित वातावरण और आवश्यक आधारभूत सुविधाओं से युक्त नए भवन के निर्माण की दिशा में स्थल चयन की प्रक्रिया पर भी चर्चा हुई।निरीक्षण के दौरान मंत्री ने महाविद्यालय की विभिन्न समस्याओं और व्यवस्थागत कमियों पर भी ध्यान दिया। विशेष रूप से कॉलेज परिसर की स्वच्छता को लेकर उन्होंने प्राचार्य से जानकारी ली। उन्होंने शिक्षण संस्थान परिसर को स्वच्छ एवं स्वस्थ वातावरण में बनाए रखने पर जोर दिया।मंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। विद्यार्थियों की सुरक्षा, बेहतर शैक्षणिक वातावरण, स्वच्छता और आवश्यक आधारभूत सुविधाओं को लेकर प्रशासन एवं शिक्षण संस्थान के अधिकारियों को अधिक जिम्मेदारी के साथ कार्य करना आवश्यक है।ऐतिहासिक राजमहल की सुरक्षा के साथ विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए तत्काल अस्थायी व्यवस्था तथा भविष्य में स्थायी आधारभूत संरचना के निर्माण पर जोर इस दौरे की प्रमुख बातें रहीं। अब ऐतिहासिक राजमहल के संरक्षण एवं पुनरुद्धार की दिशा में कितनी जल्द ठोस कदम उठाए जाते हैं, इस पर मयूरभंजवासियों की नजर है।
मयूरभंज से हिमांशु शेखर प्रहराज।