जीरकपुर। पीरमुच्छला क्षेत्र एक बार फिर अवैध खनन को लेकर सवालों के घेरे में है। पंचकूला सीमा से सटे घग्गर नदी के तटीय इलाके में रात के अंधेरे में कथित तौर पर बिना अनुमति बड़े स्तर पर रेत-बजरी की खुदाई किए जाने का मामला सामने आया है। ढकोली पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए दो नामजद आरोपियों समेत पांच अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
पुलिस के अनुसार, खनन के लिए नदी तल में पोकलेन मशीन, जेसीबी और 4 से 5 भारी टिप्परों का इस्तेमाल किया जा रहा था। आरोप है कि बिना किसी सरकारी मंजूरी अथवा वैध परमिट के रातभर नदी से रेत और बजरी निकालकर भारी वाहनों में लोड की जा रही थी। कार्रवाई की भनक लगते ही मौके पर मौजूद लोगों के फरार होने की बात भी सामने आई है।
जानकारी के मुताबिक, ढकोली थाने के एएसआई हरनेक सिंह पुलिस टीम के साथ मिड टाउन, पीरमुच्छला इलाके में गश्त कर रहे थे। इसी दौरान पुलिस को सूचना मिली कि पिंजौर निवासी यासीन और मोहाली निवासी विकास सिंगला अपने साथियों के साथ घग्गर नदी किनारे कथित तौर पर अवैध खनन करवा रहे हैं। सूचना के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई की और मामले में दो नामजद सहित कुल सात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया।
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 303(2) तथा माइंस एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) एक्ट के तहत कार्रवाई की है। संबंधित धाराओं में पुलिस जांच आगे बढ़ा रही है।
सीमा का फायदा या संगठित नेटवर्क?
पीरमुच्छला की भौगोलिक स्थिति लंबे समय से अवैध खनन को लेकर संवेदनशील मानी जाती रही है। घग्गर नदी का क्षेत्र पंजाब और हरियाणा की सीमाओं के नजदीक होने के कारण कार्रवाई करने वाली एजेंसियों के सामने सीमा क्षेत्र की चुनौती बनी रहती है। आरोप है कि रात के समय पंजाब सीमा में मशीनरी उतारकर खनन किया जाता है और कार्रवाई की भनक लगते ही वाहन हरियाणा की ओर निकल जाते हैं।
ताजा मामले में पंजाब के मोहाली क्षेत्र और पिंजौर निवासी आरोपियों के नाम सामने आने के बाद पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां खंगाल रही है। जांच का अहम पहलू यह भी रहेगा कि नदी में इस्तेमाल की जा रही भारी मशीनरी और टिप्पर किसके हैं, खनन से निकाली गई सामग्री कहां पहुंचाई जा रही थी और इसके पीछे कौन-कौन लोग सक्रिय हैं।
घग्गर के प्राकृतिक बहाव पर भी सवाल
घग्गर नदी के तल में मशीनों से बड़े पैमाने पर खुदाई केवल सरकारी राजस्व से जुड़ा मामला नहीं है, बल्कि इससे नदी के प्राकृतिक स्वरूप और बहाव पर भी असर पड़ने की आशंका रहती है। यदि बिना अनुमति लंबे समय तक खनन किया गया है तो इससे पर्यावरणीय नुकसान के साथ-साथ सरकारी खजाने को भी राजस्व की क्षति हो सकती है।
पीरमुच्छला और आसपास के घग्गर तटीय क्षेत्रों में पहले भी अवैध खनन को लेकर शिकायतें और कार्रवाई सामने आती रही हैं। ऐसे में ताजा एफआईआर के बाद पुलिस और खनन विभाग की जांच से यह स्पष्ट होना बाकी है कि मौके पर वास्तव में कितने समय से अवैध खनन चल रहा था और इसके पीछे कितने लोग सक्रिय हैं।
अब निगाह इस बात पर है कि पुलिस जांच में सामने आने वाली कड़ियां महज मौके पर मौजूद आरोपियों तक सीमित रहती हैं या कथित अवैध खनन के पूरे नेटवर्क और इसके पीछे मौजूद लोगों तक पहुंचती हैं।