गंदे पानी और बदबू के बीच तैरता भविष्य: जालौन के पिरौना में जलभराव से परेशान मासूम, अफसरों का दौरा भी साबित हुआ बेअसर
उरई। जनपद जालौन के विकासखंड कोंच के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत पिरौना से एक बेहद चिंताजनक मामला सामने आया है। यहाँ गांव के नन्हे-मुन्ने बच्चे रोजाना बदबूदार और गंदे पानी में से होकर स्कूल जाने के लिए मजबूर हैं। गांव के मुख्य मार्ग पर लंबे समय से जलभराव की गंभीर समस्या बनी हुई है, जिससे ग्रामीणों का जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है।
तालाब का रूप ले चुका है गांव का मुख्य रास्ता
ग्रामीणों के अनुसार, गांव के बीचों-बीच तालाब और नालियों का गंदा पानी जमा रहता है। उचित जल निकासी (ड्रेनेज) की व्यवस्था न होने के कारण नालियों का पानी सड़कों पर उफान मार रहा है। इसी रास्ते से होकर मासूम बच्चों को रोजाना अपने स्कूल की चौखट तक पहुंचना पड़ता है। मजबूरी ऐसी है कि बच्चे अपने कपड़े संभालते हुए गंदे पानी के बीच से निकलने को विवश हैं, जिससे हर पल संक्रमण और संक्रामक बीमारियों का खतरा बना रहता है।
अधिकारी आए, वादे हुए… पर हालात जस की तस
स्थानीय लोगों में प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के प्रति गहरा रोष व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि समस्या को लेकर कई बार शिकायतें की जा चुकी हैं। अधिकारियों से लेकर क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों तक ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण भी किया, लेकिन धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। निरीक्षण और आश्वासनों के बावजूद स्थिति आज भी “जैसे की तैसे” बनी हुई है
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें:
गांव में नालियों की सफाई और पक्की जल निकासी की तत्काल व्यवस्था की जाए।
सड़क पर जमे गंदे पानी को हटाने के लिए स्थायी समाधान निकाला जाए।
बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए कीटनाशक दवाओं का छिड़काव कराया जाए।
बीमारियों का बढ़ा खतरा
बारिश और नालियों का पानी एक जगह एकत्रित होने से इलाके में डेंगू, मलेरिया और त्वचा रोगों के फैलने का खतरा काफी बढ़ गया है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से गुहार लगाई है कि कागजी कार्रवाई से बाहर निकलकर जल्द से जल्द धरातल पर काम कराया जाए, ताकि बच्चों का भविष्य इस गंदे पानी में न डूबे।