जीरकपुर, 18 अक्टूबर। जीरकपुर के होटल पार्क प्लाजा में विश्वास फाउंडेशन, पंचकूला की ओर से गुरुदेव श्री स्वामी विश्वास जी के पीताम्बर दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित तीन दिवसीय आध्यात्मिक समागम का रविवार को समापन हो गया। समागम के अंतिम दिन ध्यान, सत्संग और भजनों के माध्यम से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक जीवन का महत्व समझाया गया। इस दौरान देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे 50 श्रद्धालुओं ने पीताम्बर धारण किया।
सुबह आयोजित ध्यान सत्र में गुरुदेव श्री स्वामी विश्वास जी ने श्रद्धालुओं को अपने अंतर्मन से जुड़ने, आत्मचिंतन करने और नियमित रूप से ध्यान को जीवन का हिस्सा बनाने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि आज की व्यस्त दिनचर्या में व्यक्ति बाहरी गतिविधियों में इतना उलझ जाता है कि खुद के लिए समय निकालना भूल जाता है। ध्यान व्यक्ति को अपने भीतर झांकने और मन को समझने का अवसर प्रदान करता है।
गुरुदेव श्री ने कहा कि नियमित ध्यान से मन की चंचलता को शांत करने के साथ-साथ जीवन में धैर्य, एकाग्रता और संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती है। ध्यान का उद्देश्य केवल मानसिक शांति प्राप्त करना नहीं, बल्कि आत्मबोध की दिशा में आगे बढ़ना और परमात्मा के प्रति विश्वास एवं समर्पण को मजबूत करना भी है। उन्होंने श्रद्धालुओं को प्रेम, करुणा, विनम्रता और सद्भाव जैसे गुणों को अपने व्यवहार में अपनाने का संदेश दिया।
सत्संग के दौरान गुरुदेव श्री ने भजन ‘बातों-बातों में बीते न उमरिया, तुझे होश न आया, यूं ही वक्त गंवाया, किया कभी न भजन ओ मेरे मन’ का गायन किया। भजन के माध्यम से उन्होंने जीवन के अनमोल समय का सदुपयोग करने और प्रभु-स्मरण से जुड़े रहने की प्रेरणा दी। भजन सुनकर संगत भावविभोर हो उठी और पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
विश्वास फाउंडेशन की अध्यक्ष साध्वी नीलिमा विश्वास जी ने कहा कि गुरुदेव की शिक्षाएं लोगों को सदाचार, सेवा और मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं। उन्होंने कहा कि सत्संग से मिलने वाली सीख को अपने जीवन में अपनाना और जरूरतमंदों की सेवा करना आध्यात्मिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। गुरु के मार्गदर्शन और नियमित ध्यान के अभ्यास से व्यक्ति अपने जीवन को सकारात्मक दिशा दे सकता है।
समागम के समापन पर गुरुदेव श्री ने ‘ॐ गुरुवे नमः’ महामंत्र का गायन किया। तीन दिवसीय इस आयोजन में श्रद्धालुओं ने ध्यान, सत्संग और भजनों के माध्यम से गुरु-भक्ति में भाग लिया। समागम ने श्रद्धालुओं को आत्मचिंतन, सेवा, प्रेम, शांति और सद्भाव के मार्ग पर आगे बढ़ने का संदेश दिया।
















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