हरदोई के भरावन ब्लॉक प्रमुख विनोद कुमार सिंह का एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में है। वीडियो में वह संडीला की मौजूदा बीजेपी विधायक के विकास कार्यों पर सवाल उठाते हुए दावा करते नजर आते हैं कि उनके ब्लॉक प्रमुख कार्यकाल में हुए विकास का 10 फीसदी काम भी विधायक ने नहीं कराया और क्षेत्र में सिर्फ गेट लगवाने पर जोर दिया गया। इसके साथ ही वह गेटों की लागत और विधायक द्वारा कथित तौर पर बड़े पैमाने पर जमीन खरीदने को लेकर भी सवाल उठा रहे हैं।
लेकिन इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल सिर्फ आरोपों का नहीं, बल्कि आरोप लगाने के समय का भी है।
विनोद कुमार सिंह बीजेपी समर्थित उम्मीदवार को हराकर ब्लॉक प्रमुख बने थे। इसके बाद उनके राजनीतिक रंग और भगवा से नजदीकी भी चर्चा का विषय रहे। पांच साल तक उसी राजनीतिक माहौल में रहने के बाद अब जब विधानसभा चुनाव की आहट सुनाई देने लगी है, तो विकास कार्यों और जमीन खरीद को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
सवाल सीधा है—अगर विधायक ने वास्तव में विकास के बजाय निजी संपत्ति बढ़ाने पर ध्यान दिया, तो पांच साल तक आवाज क्यों नहीं उठाई गई? क्या तब सब कुछ ठीक था, या तब सवाल उठाने की राजनीतिक जरूरत महसूस नहीं हुई? और अगर अब लगाए जा रहे आरोप सही हैं, तो उनकी जांच और जवाबदेही भी उतनी ही जरूरी है।
फिलहाल, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित विधायक का पक्ष सामने आना जरूरी है। जमीन खरीद से जुड़े सवाल हों या विकास कार्यों का हिसाब, जनता को तथ्यों के आधार पर जवाब मिलना चाहिए।
लोकतंत्र में राजनीतिक रंग बदलना कोई अपराध नहीं है। लेकिन जनता यह जरूर पूछेगी कि बदले हैं विचार, बदले हैं हालात या सिर्फ चुनाव का कैलेंडर?
विकास का हिसाब पांच साल का होना चाहिए, सिर्फ चुनाव के मौसम का नहीं!
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