*बिहार मोतीहारी से अमरजीत सिंह*
*पटना हाईकोर्ट के आदेश के एक महीने बाद भी अनुपालन का इंतज़ार, MGCU प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल.*
*दो शैक्षणिक वर्ष प्रभावित होने का दावा, छात्र ने समयबद्ध अनुपालन की मांग की.*
महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, मोतिहारी के मीडिया अध्ययन विभाग के छात्र आकाश कुमार के निष्कासन मामले में पटना हाईकोर्ट के आदेश के एक महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी अनुपालन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। छात्र का कहना है कि न्यायालय द्वारा निष्कासन आदेश निरस्त किए जाने के बावजूद उन्हें अब तक शैक्षणिक प्रक्रिया में पुनः शामिल करने के संबंध में कोई लिखित सूचना प्राप्त नहीं हुई है।
माननीय पटना हाईकोर्ट ने 21 सितंबर 2026 को CWJC संख्या 13311/2026, आकाश कुमार बनाम भारत संघ एवं अन्य मामले में 14 अगस्त 2024 के निष्कासन आदेश को निरस्त करते हुए याचिकाकर्ता को संस्थान में शामिल करने, पाठ्यक्रम पूरा करने और परीक्षाओं में शामिल होने के संबंध में निर्देश दिए थे।
पटना हाईकोर्ट ने अपने आदेश में एमजीसीयू प्रशासन की कार्रवाई की निष्पक्षता, प्राकृतिक न्याय के पालन और अनिश्चितकालीन निष्कासन की वैधता पर गंभीर सवाल उठाए। न्यायालय ने जाँच रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराने तथा निष्कासन से पहले विशिष्ट कारण बताओ नोटिस न दिए जाने का भी उल्लेख किया। निष्कासन आदेश निरस्त करते हुए न्यायालय ने आकाश कुमार को संस्थान में शामिल करने, पाठ्यक्रम पूरा करने और परीक्षा में शामिल होने का निर्देश दिया। ऐसे में आदेश के अनुपालन में हो रही कथित देरी छात्र के शैक्षणिक भविष्य को लेकर गंभीर चिंता पैदा करती है।
न्यायालय के आदेश के अनुपालन के लिए आकाश कुमार ने 29 सितंबर 2026 को विश्वविद्यालय के ओएसडी (प्रशासन) को प्रमाणित आदेश की प्रति के साथ लिखित प्रतिवेदन भेजा। इसके बाद 5 अक्टूबर 2026 को रिमाइंडर भी भेजा गया। दोनों प्रतिवेदनों में पुनः प्रवेश, शैक्षणिक स्थिति की बहाली, पाठ्यक्रम पूरा करने, परीक्षाओं में शामिल होने तथा अनुपालन की स्थिति की लिखित जानकारी देने का अनुरोध किया गया था।
इसके बावजूद, आकाश कुमार के अनुसार, 25 अक्टूबर 2026 तक उन्हें अनुपालन की स्थिति अथवा आगे की शैक्षणिक प्रक्रिया के संबंध में कोई लिखित सूचना प्राप्त नहीं हुई है।
आकाश कुमार का कहना है कि इस पूरे प्रकरण के कारण उनके दो महत्वपूर्ण शैक्षणिक वर्ष प्रभावित हुए हैं। ऐसे में न्यायालय से राहत मिलने के बाद भी शैक्षणिक भविष्य को लेकर बनी अनिश्चितता उनके लिए गंभीर चिंता का विषय है।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब न्यायालय ने निष्कासन आदेश निरस्त कर दिया है, तो आदेश के अनुपालन की वर्तमान स्थिति स्पष्ट करने और छात्र को शैक्षणिक प्रक्रिया में शामिल करने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं?
उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की है कि न्यायालय के आदेश का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करते हुए उनकी पढ़ाई, परीक्षा और पाठ्यक्रम पूरा करने से संबंधित आवश्यक औपचारिकताओं के लिए तत्काल स्पष्ट एवं समयबद्ध कार्यक्रम जारी किया जाए।
अब निगाहें MGCU प्रशासन पर हैं कि वह अनुपालन की स्थिति कब स्पष्ट करता है और छात्र को शैक्षणिक प्रक्रिया में शामिल करने के लिए क्या कदम उठाता है।
रिपोर्ट;अमरजीत सिंह

