पुरी में रक्तदान शिविर का आयोजन, 54 यूनिट रक्त संग्रह; दिव्यांग रवि नारायण दास का 35वां रक्तदान बना प्रेरणा
पुरी: “मानव सेवा ही माधव सेवा” के महान आदर्श को अपने जीवन का उद्देश्य बनाकर समाजसेवा के क्षेत्र में एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है डॉ. गजेंद्र सेनापति ने। अपने 57वें जन्मदिन के अवसर पर उन्होंने पुरी शहर के बालीसाही स्थित अखाड़ाशाला में आयोजित रक्तदान शिविर में अपना 100वां रक्तदान कर मानव सेवा के प्रति समर्पण और प्रतिबद्धता का संदेश दिया।
ऊर्जावान ट्रस्ट ऑफ ओडिशा, पुरी तथा सोशल एक्टिविस्ट वेलफेयर एसोसिएशन ऑफ भारत, दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस रक्तदान शिविर में कुल 54 यूनिट रक्त संग्रह किया गया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य जरूरतमंद मरीजों के लिए रक्त की उपलब्धता सुनिश्चित करना तथा लोगों को स्वैच्छिक रक्तदान के प्रति जागरूक करना था।
1995 से लगातार रक्तदान कर रहे हैं डॉ. सेनापति
डॉ. गजेंद्र सेनापति वर्ष 1995 से निरंतर रक्तदान करते आ रहे हैं। अपने 57वें जन्मदिन पर 100वां रक्तदान कर उन्होंने समाज के सामने सेवा और समर्पण की एक मिसाल पेश की। वे केवल रक्तदान तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि विभिन्न सामाजिक और जनकल्याणकारी गतिविधियों में भी सक्रिय भूमिका निभाते हैं।
असहाय और जरूरतमंद लोगों के बीच भोजन एवं वस्त्र वितरण, बाढ़ और चक्रवात जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत एवं सेवा कार्य तथा विवाह और व्रत जैसे समारोहों में बचा हुआ भोजन एकत्र कर गरीबों के बीच वितरित करना उनकी समाजसेवा के प्रमुख कार्यों में शामिल है।
समाजसेवा के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए 10 दिसंबर 2025 को विक्टोरिया यूनिवर्सिटी की ओर से उन्हें डॉक्टरेट की उपाधि प्रदान किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
एससीबी मेडिकल कॉलेज की टीम रही मौजूद
रक्तदान शिविर में रक्त संग्रह की प्रक्रिया को सुचारु रूप से संपन्न कराने के लिए कटक स्थित एससीबी मेडिकल कॉलेज के ब्लड बैंक के अधिकारी भी उपस्थित रहे। उनकी मौजूदगी में रक्त संग्रह की प्रक्रिया को आवश्यक तकनीकी एवं चिकित्सकीय सहयोग मिला।
शिविर में 54 यूनिट रक्त संग्रह होना एक उल्लेखनीय उपलब्धि रही। आयोजकों ने इस बात पर जोर दिया कि रक्त की कमी के कारण किसी भी मरीज का इलाज प्रभावित नहीं होना चाहिए। इसके लिए समाज के सभी वर्गों को स्वैच्छिक रक्तदान के लिए आगे आने की आवश्यकता है।
कई गणमान्य अतिथियों ने की सहभागिता
इस कार्यक्रम में पुरी के पूर्व विधायक जयंत कुमार षडंगी, श्रीमंदिर प्रबंधन समिति के सदस्य भगवान सुवार, पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष गौरहरि प्रधान तथा मास्टर शेफ अंजू प्रधान सहित कई गणमान्य व्यक्ति सम्मानित अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत भगवान श्रीजगन्नाथ की प्रतिमा पर धूप, दीप और पुष्प अर्पित कर की गई। इसके बाद रक्तदान शिविर की गतिविधियां प्रारंभ हुईं।
पुरी के अलावा कटक, मयूरभंज, बड़बिल और सातपड़ा क्षेत्रों से भी अनेक समाजसेवी इस आयोजन में शामिल हुए। सभी ने डॉ. सेनापति को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं और रक्तदान कर इस पुनीत कार्य में अपना योगदान दिया। उनके रिश्तेदारों, मित्रों और स्थानीय लोगों ने भी शिविर में भाग लेकर रक्तदान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई।
दोनों पैर नहीं, फिर भी रवि नारायण ने किया 35वां रक्तदान
शिविर का एक प्रमुख आकर्षण कटक के रवि नारायण दास रहे। दोनों पैर नहीं होने के बावजूद उन्होंने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और सेवा भावना के बल पर दूसरों की सहायता से शिविर स्थल पर पहुंचकर अपना 35वां रक्तदान किया।
उनके इस साहसिक और प्रेरणादायक कदम ने उपस्थित अतिथियों तथा अन्य रक्तदाताओं को गहराई से प्रभावित किया। शारीरिक चुनौतियां भी उनके मानव सेवा के संकल्प को नहीं रोक सकीं। उनका यह कार्य समाज को संदेश देता है कि दूसरों की मदद करने की इच्छा और सेवा भावना किसी शारीरिक बाधा की मोहताज नहीं होती।
रवि नारायण दास का 35वां रक्तदान और डॉ. गजेंद्र सेनापति का 100वां रक्तदान इस शिविर के दो सबसे प्रेरणादायक पहलू रहे।
रक्तदान से बचाई जा सकती हैं अनमोल जिंदगियां
रक्तदान एक ऐसा महादान है, जिससे जरूरतमंद मरीजों की जान बचाई जा सकती है। डॉ. गजेंद्र सेनापति के 100वें रक्तदान और रवि नारायण दास के 35वें रक्तदान ने समाज को सेवा, समर्पण और मानवता का अमूल्य संदेश दिया है।
आयोजन के माध्यम से लोगों से अपील की गई कि वे रक्तदान के महत्व को समझें और स्वेच्छा से इस पुनीत कार्य में भाग लें। एक रक्तदाता का दिया हुआ रक्त किसी जरूरतमंद व्यक्ति के जीवन में नई आशा जगा सकता है।
संदेश: आइए, रक्तदान करें और मानव जीवन बचाएं। क्योंकि मानव सेवा ही माधव सेवा है।
मयूरभंज से हिमांशु शेखर प्रहराज, स्टेट हेड।
