तुलना दुख का द्वार, स्वीकार से मिलता है आनंद : ब्रह्माकुमारी अनामिका बहन
परसपुर गोण्डा।। नगर स्थित प्रजापिता ब्रह्माकुमारी विश्वविद्यालय शाखा में आध्यात्मिक संदेश के माध्यम से जीवन में संतोष, सकारात्मकता और आत्मिक आनंद का महत्व बताया गया। शाखा की संचालिका राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी अनामिका बहन ने उपस्थित शिव बाबा के अनुयायियों एवं शिवभक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि दूसरों से अपनी तुलना करने के बजाय स्वयं के जीवन में उपलब्ध सुख, साधन और अवसरों का सम्मान करना चाहिए।
उन्होंने प्रेरक संदेश देते हुए कहा, “दूसरों की थाली में घी लगी रोटी देखकर अपनी रोटी को सूखी मत समझो। अपने पास जो है, वही अपने कर्मों का प्रसाद है।” उन्होंने समझाया कि दूसरों के सुख-साधनों को देखकर अपने जीवन को कमतर आंकना मन में असंतोष और दुख पैदा करता है, जबकि अपनी परिस्थितियों को सहजता से स्वीकार करना आनंद का मार्ग प्रशस्त करता है।
ब्रह्माकुमारी अनामिका बहन ने कहा कि जीवन में सच्ची खुशी केवल अधिक पाने में नहीं, बल्कि जो प्राप्त है उसके प्रति कृतज्ञ रहने और सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने में है। तुलना मनुष्य को अशांति की ओर ले जाती है, जबकि स्वीकार भाव मन को शांति और संतुष्टि प्रदान करता है। इसलिए हर व्यक्ति को दूसरों से प्रतिस्पर्धा करने के बजाय अपने विचारों, कर्मों और व्यवहार को बेहतर बनाने का प्रयास करना चाहिए।
इस अवसर पर डॉ. सुरेश चंद्र तिवारी, कमलाकांत सिंह, राधेश्याम मिश्रा, जगदीश सोनी, श्यामा, रितिका, मंजू, रेनू, पूनम सहित अन्य भक्तगण उपस्थित रहे।
