सहारनपुर
सहारनपुर। अहोई अष्टमी को केवल पुत्रवती माताओं तक सीमित रखने की परंपरा में बदलाव लाने की पहल करते हुए मोक्षायतन अंतर्राष्ट्रीय योग संस्थान ने सुसंतति और समानता का संदेश दिया। संस्थान में अहोई अष्टमी के अवसर पर व्रत, वैदिक यज्ञ और प्रार्थना का आयोजन किया गया। इसमें पुत्र-पुत्रियों के लिए समान भाव से पर्व मनाते हुए नई पीढ़ी को सामर्थ्यवान, संस्कारवान और स्वाभिमानी बनाने की कामना की गई।संस्थान के संस्थापक गुरुदेव पद्मश्री स्वामी भारत भूषण की प्रेरणा से आयोजित कार्यक्रम में आईटीसी के शाखा प्रबंधक संदीप शर्मा और उनकी पत्नी आशा शर्मा यजमान रहे। इस दौरान संदीप शर्मा ने कहा कि अहोई अष्टमी सुसंतति का पर्व है। इसे केवल पुत्रों तक सीमित रखना भेदभाव को बढ़ावा देता है। संतान के कल्याण के लिए मनाए जाने वाले इस पर्व में बेटियों के प्रति भी समान भाव होना चाहिए। स्वामी भारत भूषण ने कहा कि सामाजिक परिस्थितियों के कारण परंपराओं में अनजाने में पनपी कुरीतियों को दूर करना आवश्यक है। मोक्षायतन की पहल से करवा चौथ पर पति-पत्नी एक-दूसरे के लिए व्रत रखने लगे हैं। इसी तरह अहोई अष्टमी पर बेटियों के माता-पिता भी व्रत रखकर समानता का उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं। कार्यक्रम में स्वामी भारत भूषण ने सपरिवार अहोई अष्टमी की कथा सुनाई। इसमें माता-पिता के साथ पुत्र-पुत्रियों ने भी सहभागिता की। साधकों ने योगाभ्यास, संध्या और वैदिक यज्ञ के साथ माता-पिता के चरण स्पर्श कर नित्य व्यायाम एवं योगाभ्यास के माध्यम से राष्ट्रधर्म के लिए स्वयं को तैयार करने का संकल्प लिया।इस अवसर पर गुरुदेव स्वामी भारत भूषण, गुरुमाता इष्ट शर्मा, नेशन बिल्डर्स एकेडमी की प्रतिनिधि मिथलेश शर्मा और अभिभावकों ने देश के बच्चों को बलवान, विद्वान, धनवान और दयावान बनाने की प्रार्थना की। यज्ञ की व्यवस्था नई पीढ़ी के शिवम, विष्णु और ध्रुव पाठक ने योगाचार्य सीमा गुप्ता, व्यवस्था प्रमुख ललित रुहेला, ध्यान प्रमुख विजय सुखीजा और कार्यक्रम संयोजक नंद किशोर शर्मा के मार्गदर्शन में संभाली।
रमेश सैनी आशीष सैनी सहारनपुर इंडियन टीवी न्यूज़
